नई दिल्ली : प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत लाभार्थियों को मुहैया कराई जाने वाली पहली किस्त के लिए आधार की आव्श्याकता नहीं होने वाली है. सरकार ने इस बात को स्पष्ट रूप से कहा है कि मार्च में जारी होने वाली पहली किस्त में आधार या उसके पंजीकरण की जगह वोटर आईडी, लाइसेंस और नरेगा जॉब कार्ड के जरिए लाभार्थियों की पहचान को पुख्ता किया जाएगा.
बजट में घोषित योजना के लाभ को किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र ने राज्य सरकारों से अलग-अलग आधारों पर उनका डेटा तैयार करने की बात कही है. राज्यों के द्वारा जिलावार लाभार्थियों की सूची पीएम-किसान पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी जिससे की जानकारी लिया जा सके. इसके आधार पर सीधे किसानों के बैंक खातों में पहली किस्त भेज दी जाएगी. इसके अलावा नजर रखने के लिए परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) की एक टीम बनायी जाएगी. योजना का वित्त पोषण केंद्र सरकार के द्वारा किया जाएगा. इस योजना के द्वारा 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों को लाभ मिलने के आसार जताए गए हैं. पहली किस्त 1 दिसंबर, 2018 से 31 मार्च, 2019 के लिए जारी किया जाएगा.
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अगली बार के लिए अनिवार्य होगा आधार
सरकार के द्वारा इस बात को स्पष्ट कर दिया गया है कि दिसंबर से मार्च के समय तक के लिए उपलब्ध करायी जाने वाली पहली किस्त में लाभार्थियों को आधार पंजीकरण को लेकर छूट दी जाएगी लेकिन इसके बाद दोहरेपन को रोकने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया जाएगा. केंद्र ने निर्देश में इस बात को भी स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित कराएं कि लाभार्थी परिवारों में कोई दोहरापन न हो साथ ही कोई भी सूचना ऐसी न हो जो गलत या अधूरी हो.
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के द्वारा राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा गया है. जिसमें कहा गया है कि “मौजूदा भूमि रिकॉर्ड के आधार पर राज्यों द्वारा लाभार्थियों को चिन्हित किया जाए. बजट में घोषणा के दिन तक यानी एक फरवरी तक जिनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज है, वह योजना का लाभ पाने के योग्य हैं. हालांकि, उत्तर पूर्व के राज्यों में इस योजना को लागू करने के लिए अलग विकल्प रहेगा, क्योंकि वहां भूमि पर मालिकाना हक सामुदायिक आधार पर है.” पत्र में ये भी कहा गया है कि राज्यों को छोटे और सीमांत किसानों के भूमि रिकॉर्ड के आधार पर नाम, लिंग, जाति, आधार नंबर (नहीं होने की सूरत में आधार पंजीकरण), बैंक खाता और मोबाइल नंबर का डेटा मुहैया कराना होगा.
एससी-एसटी वर्ग की पहचान के भी निर्देश हो चुके हैं जारी
पत्र के मुताबिक लाभार्थी के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से होने की जानकारी भी राज्यों को उपलब्ध करायी जाएगी. साथ ही जिला स्तर पर निपटारा समिति का गठन करना ताकि लाभार्थियों की शिकायतों को समय पर निपटाया जा सके. मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर मामले की जांच करेगा और किसानों को योजना के बारे में पूरी तरह से जानकारी मुहैया कराना, जागरूकता अभियान चलाना होगा.
