राम मंदिर मामले पर ओवैसी ने दिया ऐसा बयान कि हर कोई रह गया हैरान

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राजनीति एक ऐसी दलदल है जो यहां एक बार आ गया और वो चाहे कितना ही अपना काम इंमानदारी से क्यूं न कर लें लेकिन उसे बुरा ही कहा जाता है. राजनीति में एक बात तो जग जाहिर है कि जो केंद्र सरकार और धार्मिक मसलों पर अपनी राय देता है उसे सियासती लोग और मीडिया ऐसे पेश करती है जैसे वो केवल एक खास धर्म को ज्यादा तवज्जो दे रहा हो. राजनीति में साफ और कड़वा बोलने के लिए एक सांसद काफी मशहूर है, वो कोई और नहीं बल्कि हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी है. अपने सख्त रवैये और हर मुद्दे पर अपनी सीधी राय रखने की वजह से ओवैसी हमेशा विवादों में गिरे रहते है. अपनी इसी छवि पर पहली बार ओवैसी ने खुलकर सबके सामने अपनी राय रखी .

दरअसल, AIMIM यानि (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 10 मार्च को कार्यक्रम ‘टॉक विद असद’ में आएं थे. इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनकी छवि एक नफरत फैलाने वाले शख्स के रूप में बन गई है इस बात के जवाब में ओवैसी ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उन्हें ‘नफरत भरे भाषण’ देने वाले शख्स के तौर पर पेश किया जाता है या किसी खास तबके की नुमाइंदगी करते दिखाया जाता है. वो एक सासंद है और सांसद के तौर पर उनके ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां है और अपनी जिम्मेदारियां पूरा करने पर ध्यान होने के कारण वो इन बातों की परवाह नही करते है कि उन्हें लोगों के सामने कैसे पेश किया जा रहा है.

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इतनी ही नहीं ओवैसी ने आगे कहा कि उनके शुभचिंतक भी कितनी बार इस बात पर अपनी चिंता जाहिर कर चुके है कि उन्हें एक छवि में बांध दिया गया है लेकिन ओवैसी का मानना है कि वो यहां अपनी छवि बनाने या बढ़ाने नहीं आएं है. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उनके विरोधी उनकी कैसी छवि देश के सामने पेश कर रहे हैं या उन्हें किस छवि में बांध रहे हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि उनका मन साफ है वो सिर्फ वहीं काम करना चाह रहे हैं जो उन्हें एक सांसद होने के नाते सौपा गया है. सांसद होना बहुत ही सम्मान की बात है.

आपको बता दें कि ओवैसी के हर भाषण को उनके विरोधी दल धर्म से जोड़कर पेश करते है. वो लोगों के सामने ओवैसी की इसी छवि बना रहे है जो सिर्फ मुसलमानों के हित के लिए सोचता है. उसे हिन्दुओं से कोई फर्क नहीं पड़ता है. चाहे वो राम मंदिर का मामला हो या कोई और राष्ट्रिय मुद्दा. अगर ओवैसी उस पर अपनी राय रखते है तो उनके विरोधी दल उसे एक धार्मिक मुद्दा बना देते है. इसलिए ओवैसी किसी की बातों पर ध्यान नहीं देते है वो वहीं करते है जो उनका काम है.

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क्योंकि वो कहते है न किसी के बनाने और बिगाड़ने से कुछ नहीं होता है अगर उस शख्स के काम सही है तो वो दुनिया में अपना नाम कर ही लेता है. विपक्ष ओवैसी की कितनी भी शख्सियत पर सावलयानिशान खड़े कर दें लेकिन इसके बावजूद भी लाखों लोग उन्हें सुनने के लिए उनकी रैलियों में आते है. हैदराबाद में उनका एक अलग ही रूतबा देखने को मिलता है.

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