दिल्ली में दिवाली से पहले एक बार फिर से प्रदूषण का साया मंडराने लगा है. प्रदूषण हो या फिर कोई भी परेशानी दिल्लीवालों का दिल इतना बड़ा है कि क्या कहने. दिल्ली में लोगों के पास इतना काम है कि सुबह जागते ही सब रोबोट की तरह शुरू हो जाते हैं और सूरज के ढलने के बाद ही रुकते हैं. रोजमर्रा की लाइफ इतनी स्ट्रेस और पेनफुल हो गई है कि आराम और सुकून के लिए बस वीकेंड ही बचता है. खासकर ऑफिस वर्कस के लिए तो वीकेंड जैसे वरदान होता है.

वीकेंड पर दिल्ली में रहने वाले लोग अक्सर मूवी, मॉल यहां तक ही घूमने का मन बना पाते हैं, क्योंकि दूर जाने का मतलब है कम से कम 5 दिन. पर इस वीकेंड आप कहीं जाने की सोच रहे हैं और वो भी सिर्फ दो दिनों के लिए तो दिल्लीवालों आपको हम एक ऐसी जगह बताने जा रहे हैं, जहां जाकर आपकी जुबान से सिर्फ एक ही शब्द निकलेगा वाह – वाह.
दिल्ली से महज 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक छोटा सा इलाका है लैंडस्डाउन. प्राकृतिक छटा को देखने के लिए दिल्ली के नजदीक इससे बेस्ट जगह कोई हो ही नहीं सकती. सुबह पहाड़ों मनोरम दृश्य में उगते सूरज को हरियाली के बीच देखने का लुफ्त उठाने के लिए यह जगह बेस्ट है.
इस जगह की खास बात ये है कि यहां पर पहाड़ों के बीच कई छोटे-छोटे गांव आपको देखने को मिल जाएंगे. बारिश के मौसम में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन मौसम साफ हो तो आंखों और मन को सुकून देनी वाले दूर तक बर्फ से ढके पहाड़ और उनके बीच बहते छोटे झरने देखते ही आपको फिल्म के सीन याद आने लग जाएंगे.

100 साल से ज्यादा पुराने चर्च
लैंडस्डाउन में पहाड़ों के अलावा बहुत सी जगहें घूमने के लिए हैं. जैसे यहां पर बसे हुए 100 साल से भी ज्यादा पुराने चर्च. पहाड़ों के बीच बसे हुए दोनों चर्च सिर्फ संडे को ही खोले जाते हैं. चर्च के अंदर घूसते ही आपको अंग्रेजी हुकूमत का एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. चर्च के अलावा यहां की भुल्ला ताल भी काफी फेमस है.
झील में लीजिए बोटिंग का मजा
लैंडस्डाउन में आप जैसे-जैसे ऊपर पहुंचेंगे आपका मन इस जगह के लिए उतना ही उत्साहित होता रहेगा. टिप-टॉप पर जाने के बाद आप नीचे आते वक्त एक छोटी सी झील में फैमिली, फ्रेंड्स के साथ वोटिंग का लुत्फ उठा सकते हैं. प्राकृतिक नजारों से भरपूर इस झील में आपको ढेर सारी बत्तख और हंस अटखेलियां करते हुए मिल जाएंगे. इतना ही नहीं जब आप इन नन्हें परिंदों को छूने की कोशिश करेंगे तो ये आपको अपनी बाहों में भरने का मौका देंगे.
सूर्यास्त देखने के लिए बेस्ट है ताड़केश्वर मंदिर
अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं तो भी लैंडस्डाउन आपके लिए बेस्ट जगह है. सुबह टिप एंड टॉप पर पहाड़ों के बीच उगते सूरज को देखने के बाद आप ढलते सूरज को देखने के लिए मां संतोषी के मंदिर जा सकते हैं. मां संतोषी के मंदिर से थोड़ा सा ऊपर भगवान शिव का सिद्धपीठ मंदिर जिसे ताड़केश्वर के नाम से जाना जाता है वह स्थापित है.
शांति से भरपूर है ये जगह…
इस जगह की सबसे खास बात ये है कि मनाली, शिमला, ऊंटी जैसे इलाकों की तरह आपको यहां सैलानियों की भारी भीड़ देखने को नहीं मिलेगी. हर भरे रास्तों पर सेना की गाड़ियों के अलावा शायद ही आपको कोई शख्स नजर आए. दूर-दूर तक फैली शांति और पेड़ ही आपको दिल्ली के तनाव भरे माहौल से जुदा कर देंगे.
कैसे पहुंचे यहां पर…
लैंसडाउन की सबसे खास बात ये है कि यहां पर पहुंचने के लिए आपको न तो ज्यादा पैसे खर्च करने है और न ही ज्यादा वक्त. अगर आप भी मेरी तरह दिल्ली से जा रहे हैं तो कश्मीरी गेट से सीधे बस पकड़िए और कोटद्वारा बस अड्डे पर उतर जाइए. कोटद्वार बस अड्डे से सीधा प्राइवेट गाड़िया लैंसडाउन पहुंचाती हैं. इसके बाद आप चाहे तो पहाड़ों पर पैदल चलकर घूम सकते हैं या फिर नीचे से ही गाड़ी हायर कर सकते हैं, लेकिन गाड़ी आपको खुद चलानी होगी.
बेहद सेफ है ये जगह
इस जगह की सबसे खास बात ये है कि यह पूरा इलाका भारतीय सेना की सुरक्षा में कैद है. आप थोड़ी-थोड़ी दूर पर सेना के जवान हंसते हुए मिल जाएंगे. कई बार वो आपसे बात करते हुए आपके बारे में जानना चाहेंगे और आपको इस जगह के बारे में किसने बताया ये भी पूछेंगे. दिल्ली से पास होने के कारण आप इस जगह को आप 24 घंटे से भी कम समय में घूम सकते हैं.
आशु कुमार
(डिस्कलेमर: लेखक पेशे से पत्रकार हैं और उनके द्वारा लिखी गई बात उन्हीं के अनुभव के आधार पर है.)
