प्रयागराज/लखनऊ: सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पर्ची ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है. सवाल उठना तब और लाजमी हो जाता है जब मामला सूबे के स्वास्थ्यमंत्री के शहर का हो. दरअसल, इलाहाबाद से बदलकर प्रयागराज हुए शहर के एक सरकारी अस्पताल में चौकाने वाला मामला सामने आया है. यहां सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मरीज को बाहर से दवा लिखी. और पैसे ना होने पर मरीज के परिजनों को मेडिकल स्टोर वाले को पायल गिरवी रखकर दवा लानी पड़ी.
बत दें कि, प्रयागराज से करीब 35 किलोमीटर दूर सैदाबाद के गरीब किसान राजकुमार अपनी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी कराने मेडिकल कॉलिज के स्वरुप रानी अस्पताल लाए थे. यहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन बताकर दवाईयों की लंबी चौड़ी लिस्ट राजकुमार को सौंप दी और दलील दी कि सरकारी अस्पताल में कोई सामान ना होने की वजह से सब बाहर से ही खरीद कर लाना होगा. ऑपरेशन के बाद पैदा हुई बेटी को डॉक्टरों ने चिल्ड्रेन हॉस्पीटल रेफर कर दिया. यहां भी सरकारी सुविधा के नाम पर शोषण किया गया.
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बार-बार बाहर से ही दवाईयां मंगवाई गई. दो बार दवा लाने के बाद राजकुमार के पास पैसे खत्म हो गए. बावजूद इसके सरकारी अस्पातल के डॉक्टर ने बाहर एक विशेष दुकान से दवा लाने की लिस्ट थमा दी. उधर रामस्वरुप अस्पताल में भर्ती राजकुमार की पत्नी के लिए डॉक्टरों ने फिर बाहर से दवा लिखी. इस बार राजकुमार की बहन दवा लेने गई तो 1200 रुपए कम पड़ गए. मेडिकल स्टोर संचालक ने 1 दिन के लिए दवा उधार देने से मना कर दया तो उन्होंने अपनी पायल के बदले दवा देने को कहा. मेडिकल स्टोर संचालक ने दवा के बदले पायल रखकर दवा की रशीद पर लिख दिया कि, 1240 रुपये लेकर पायल देनी है. लेकिन इतना सब होने के बाद भी राजकुमार की बेटी की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि, वेंटिलेटर ना मिलने से बच्ची की मौत हुई है.
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इधर पायल की रशीद सोशल मीडिया पर वायरल होने पर नाराज डॉक्टरों ने राजकुमार की पत्नी को मेटनिटी वॉर्ड से निकालकर जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया. वहीं फजीहत होने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस मामले में तीन सीनियर डॉक्टर्स की एक कमेटी बनाकर पांच दिन में जांच मांगी है. वही इस मामले में मेडकलस्टोर संचालक के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है.
