लखनऊ/दिल्ली: 8 दिन में चार दौर की बातचीत हो चुकी है. लेकिन किसी भी दौर की दलीलें, इस दंगल को खत्म नहीं करा पा रही हैं. किसान अब 5 कानूनों में बदलाव की मांग कर रहे हैं. कृषि कानून पर किसान और सरकार के बीच हो रही रस्साकशी में अब राजनीति भी छोर देख रही हैं. वहीं शुरू हो गया है अवार्ड वापसी का दौर अब 5 दिसंबर को अगली मीटिंग होगी, लेकिन सवाल ये है कि, कब होगी इस रात की सुबह?
फिर नई तारीख
तारीख पर तारीख की तर्ज पर, किसान आंदोलन में भी बातचीत पर बातचीत हो रही है. लेकिन बात, बनती नहीं दिख रही हैं. क्योंकि, आंदोलन के 8 वें दिन हुई बातचीत भी किसी नतीजे पर आगे नहीं बढ़ती नहीं दिखी और अब एक बार फिर 5 दिसंबर को बातचीत होगी।
मीटिंग में क्या हुआ ?
विज्ञान भवन में हुई चौथे राउंड की मीटिंग में, किसानों ने 10 पन्नों का ड्राफ्ट पेश करते हुए, कॉनटैक्ट फार्मिंग के 12 और कमोडिटी एक्ट के 8 बिंदु भी बैठक में उठाए गए. वहीं MSP एक्ट में 17 बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए किसानों ने लिखित में MSP की गांरटी मांगी हालांकि, मीटिंग के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि, MSP में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा ।
सियासत में हलचल
अन्नदाता के आंदोलन में अब सियासत भी अंगड़ाई लेती दिख रही है…या यूं कहें कि, किसान आंदोलन की उपजाऊ जमीन पर जज्बातों के अंकुर बोए जा रहे हैं.अकाली दल वाले प्रकाश सिंह बादल ने किसान कानून के विरोध में पदम विभूषण और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पदम भूषण लौटा दिया.35 खिलाड़ियों ने भी 5 दिसंबर को अपने पुरस्कार वापसी का ऐलान किया है.वहीं बंगाल वाली ममता दीदी ने देशभर में प्रदर्शन की बात कही है,हालांकि, इन सबके बीच पंजाब वाले कैप्टन अमरिंद थोड़े बदले हुए किरदार में दिखे. अमरिंदर सिंह ने कहा कि, किसानों से बात करके मामला खत्म होना चाहिए.।
आखिर समाधान क्या?
अंतहीन हो रहे अन्नदाता के इस आंदोलन में, किसान जहां अपनी मांगों के लेकर अडिग हैं, तो वहीं सरकार भी अपनी बात पर अड़ी हुई है. अब देखना होगा कि, कशमकश और कयास के मझधार में फंसी किसान आंदोलन की नाव विश्वास के किनारे पर आकर कब ठहरेगी. और इस रात की सुबह कब होगी ?
