लखनऊ: सबसे बड़े पार्टी होने के चलते मौजूदा वक्त में बीजेपी के पास ना तो नेताओं की कोई कमी है और ना ही कार्यकर्ताओं की. लेकिन एकाएक गुजरात से एक आईएएस अधिकारी का रिटायर लेना और उत्तर प्रदेश की राजनीति में पदार्पण करना प्रदेश के गलियारों में तमाम प्रश्नों का सबब बना हुआ है. और तो और खुद बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता एक दूसरे को सवाल भरी नजरों से देखकर पूछना चाह रहे हैं कि, अमां ये माजरा क्या है ?
इधर सदस्यता उधर MLC
दरअसल, मूलत: मऊ के निवासी अरविंद कुमार शर्मा 20 साल तक नरेंद्र मोदी के साथ काम कर चुके हैं. गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईएएस रहे अरविंद कुमार शर्मा गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए।.उन्होंने कहा कि मुझे एक दिन पहले नई भूमिका के लिए कहा गया। मेरी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है, मैं एक पिछड़े क्षेत्र से आता हूं। इसके बाद भी पार्टी में लाकर यह सम्मान नरेंद्र मोदी और भाजपा ही दे सकती है. बता दें कि, पार्टी में शामिल होते ही बीजेपी ने उन्हें MLC उम्मीदवार भी बनाया है सोमवार को अरविंद शर्मा ने नामांकन भी दाखिल किया.
‘शर्मा जी’ बनेंगे मंत्री !
अरविंद शर्मा पीएम मोदी के बेहद खास माने जाते हैं. इधर MLC कैडिडट बनते ही सियासी गलियारों में अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि, अरविंद शर्मा को योगी सरकार में बड़ा और अहम रोल मिलेगा. बीते दिनों तो चर्चा ये भी रही कि, अरविंद शर्मा डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की जगह ले सकते हैं. अब खबर ये है कि, अगले सप्ताह योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार होना है और इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लखनऊ आ सकते हैं.
जितने मुंह उतनी बात
दरअसल, अचानक अरविद शर्मा का पार्टी में आना और इतनी तवज्जों पाना पार्टी के कई नेताओं को नहीं पच रहा है. खुद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता तमाम तरह की बातें कर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो ये अंदाजा भी लगा दिया कि, अरविंद शर्मा जब बीजेपी में शामिल हुए तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव ने उन्हें सदस्यता दिलाई लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य नदारद थे. कुछ लोग दबी जुबान कह रहे हैं कि, नदारद नहीं नाराज थे.
