राजा भैया ने बनाई अपनी पार्टी, दलितों के मुद्दे पर कही ये बात

अपना लखनऊ होमपेज स्लाइडर

लखनऊ/प्रतापगढ़: तमाम पार्टियों की फेहरिस्त में उत्तर प्रदेश के सियासी पटल पर एक और राजनीतिक दल ने एंट्री मारी है. शिवपाल यादव की समाजवादी प्रगतिशील पार्टी के बाद प्रतापगढ़ वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के जज्बातों ने जोर मारा है. करीब 30 साल से निर्दलीय चुनाव लड़ते रहे राजा भैया ने अपना राजनीतिक दल बनाने का ऐलान किया है. राजा भैया ने जनसत्ता पार्टी के नाम के अलावा दो और नाम का आवेदन चुनाव आयोग में जमा कराया है. फिलहाल पार्टी का झंडा और लोगो जारी करते हुए राजा भैया ने कहा है कि, दो महीने के अंदर सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी राज्य कार्यकारिणी का गठन करके आगे की रणनीति पर काम किया जाएगा.

वैसे तो चुनावी सीजन में नई पार्टियों का एकाएक आना कोई नई बात नहीं है. लेकिन रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपनी पार्टी की जो प्राथमिकताएं गिनाई हैं. उसके हिसाब से तो यूपी की सियासत में हलचल मचना तय है. एक ओर सभी दल जहां दलितों का दिल जीतने की जुगत में दिन-रात एक किए हुए हैं. वहीं राजा भैया ने मीडिया को संबोधित करते हुए साफ कहा है कि, उनकी पार्टा एससी-एसटी एक्ट का विरोध करेगी. गैर दलितों के साथ किसी भी अन्याय पर आवाज बुलंद करेगी.

एससी-एसटी एक्ट पर बीजेपी सरकार के साथ-साथ सभी दलों की नीयत पर सवाल उठाते हुए राजा भैया ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट के संधोशन के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार अध्यादेश लाई और सभी दलों ने मौन रहकर उसका समर्थन किया. इस मसले पर पहले विवेचना और फिर गिरफ्तारी की तरफदारी करते हुए राजा भैया ने दलितों के प्रमोशन में आरक्षण पर भी अंगड़ाई ली है. प्रमोशन में आरक्षण पर अपना रुख साफ करते हुए उन्होंने कहा कि, जाति के बजाए गुणवत्ता और वरिष्ठता को परखा जाए. गैस सब्सिडी की तरह संपन्न लोगों का आरक्षण भी बंद किया जाए.

एससी-एसटी एक्ट पर मुखर और प्रमोशन में आरक्षण पर तीखे तेवर के साथ. राजा भैया ने जता दिया कि, उनकी राजनीति का रंग औरों से अलहदा होगा. वहीं इन मुद्दों पर मुखरता को उन्होंने मजबूरी करार दिया. उनकी मानें तो इन मुद्दों पर कोई और बोलने को तैयार ही नहीं है. लिहाजा हमें पार्टी बनानी पड़ी.

30 तारीख को ही क्यो होगा ऐलान?
बता दें कि, यूपी के प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से लगातार निर्दलीय विधायक रहे राजा भैया 30 नवंबर को अपने राजनीतिक करियर के 25 साल पूरे करने जा रहे हैं.राजा भैया इसी खास मौके पर अपनी पार्टी की घोषणा कर सकते हैं.

राजा भैया ने बनाई है अपनी पार्टी?
दरअसल, अपने सियासी करियर के 25 साल होने के अवसर पर राजा भैया ने अपने समर्थकों और अन्य लोगों से एक सर्वे कराया जिसमें 3 विकल्प रखे गए थे…

1- क्या राजा भैया को अपनी पार्टी बना लेनी चाहिए

2- क्या राजा भैया को किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए

3- क्या हमेशा की तरह निर्दलीय ही चुनाव लड़ते रहना चाहिए

खुद राजा भैया के मुताबिक इस सर्वे का जो परिणाम आया उसमें ज्यादातर लोगों की राय ये रही कि राजा भैया को अपनी पार्टी बना लेनी चाहिए.और इसी आधार पर राजाभैया ने राजनीतिक पार्टी बनाने का निर्णय लिया है.

कैसा रहा है राजा भैया का राजनीतिक सफर?
राजा भैया ने 26 साल की उम्र में 1993 में राजनीति में कदम बढ़ाए तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. निर्दलीय रूप में हमेशा चुनाव लड़ा और कल्याण सिंह, मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे.क्षत्रिय नेताओं में राजा भैया का कापी दबदबा है.

2019 का क्या है प्लान?
राजाया भैया गैर दलितों यानि सवर्ण, ओबीसी और मुस्लिमों के जरिए आगे का रास्ता तैयार करने में लगे हैं. वहीं ApnaUttarpradesh के सूत्रों की मानें तो राजा भैया की नजर क्षत्रिय नेताओं के अलावा उन बागी नेताओं पर है जो टिकट ना मिलने पर बगावत का झंडा बुलंद करेंगे. तब राजा भैया उन्हें अपनी सियासी सल्तनत में शामिल करके 2019 के सिपहसलार तैयार करेंगे.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *