नई दिल्ली/लखनऊ: अमृतसर में हुए हादसे ने एक बार फिर सरकार की रेल नीति को उजागर कर दिया है. अमृतसर का रेल हादसा. सरकार के दावों की पोल तो खोल ही रहा है. साथ ही ये भी बता रहा है कि, सरकार कोई भी हो, रेलवे हमेशा खस्ताहाल रहेगा. अमृतसर रेल हादसे में करीब 60 लोगों की जान जा चुकी है.
लेकिन बताया जा रहा है कि ये आंकड़ा 100 के पार भी जा सकता है. मोदी सरकार रेल यातायात को सुधारने के बड़े-बड़े वादों के साथ सत्ता में आई थी. लेकिन इन 4 साल में कितने रेल हादसे हुए है इस पर नजर डालते हैं.
पिछले चार में उत्तर-प्रदेश में बड़े रेल हादसे
अगस्त 2017
आज़मगढ़ से दिल्ली से जा रही कैफियत एक्सप्रेस की ट्रेन इंजन सहित दस डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे में कम से कम 50 लोग घायल हो गए.
30 मार्च 2017
यूपी के महोबा में महाकौशल एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस हादसे में 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
28 दिसंबर 2016
उत्तर प्रदेश में कानपुर के नजदीक अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस के 15 कोच पटरी से उतर गए थे. इस हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
20 नवंबर 2016
उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस भयानक हादसे में 150 लोगों की मौत हो गई थी और 260 लोग घायल हो गए थे.
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20 मार्च 2015
उत्तर प्रदेश में रायबरेली के बछरांवा में जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 32 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
26 मई 2014
यूपी के ही संत कबीर नगर में गोरखाधाम एक्सप्रेस ने एक मालगाड़ी को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी.
4 मई 2014
दिवा सावंतवादी पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतर गई थी. हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
