3 जून…मायावती और समाजवादी पार्टी का है ये खास कनेक्शन…जानकर दंग रह जाएंगे

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लखनऊ: कहते हैं कि, इतिहास खुद को दोहराता जरुर है. समाजवादी पार्टी और बसपा सुप्रीमो मायावती से जुड़े ऐसे ही एक इतिहास ने फिर करवट बदली है. करीब 25 साल पहले भी सपा-बसपा के सियासी रिश्ते खराब हुए थे और अब एक बार फिर सपा-बसपा के रिश्तों में दरार आई है. अंतर केवल इतना है कि, मामला तब मुलायम सिंह और मायावती के बीच का था और आज अखिलेश यादव और मायावती के बीच का मुद्दा है.

3 जून से क्या है कनेक्शन
दरअसल, 2 जून 19 की रात को लखनऊ में जो गेस्ट हाउस कांड हुआ उसने 3 जून क पूरे देश में कोहराम मचा दिया था. उस घटना के बाद सपा और बसपा के बीच की सियासी दुश्मनी जग जाहिर रही. तमाम-नफा नुकसान के बावजूद दोनों दल कभी साथ नहीं आए. लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की पहल से इस सालों पुरानी दुश्मनी का दी एंड हुआ. दशकों की अदावत को भुलाकर दोनों दल दोस्त बने साथ चुनाव लड़ा लेकिन आज 3 जून 2019 को अपने पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मायावती ने इस रिश्ते के भी दीएंड के संकेत दे दिए. मायावती ने अपने पदाधिकारियों से कहा है कि, लोकसभा चुनाव में सपा के वोट का ट्रांसफर नहीं हुआ. यादव वोट हमें मिला नही जो 10 सीट जीती हैं वो अपने वोटबैंक और मुस्लिम वोटरों की वजह से मिली हैं. और अब बसपा अकेले विधानसभा उपचुनाव की सभी 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. यानि 3 जून को सपा, मायावती के बीच एक और रिश्ते में दरार आ गई.

क्या है गेस्टहाउस कांड
साल 1993 में बीजेपी को हराने के लिए सपा-बसपा ने गठजोड़ किया था.दोनों के साथ लड़ने का परिणाम ये हुआ कि, बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई और बसपा के समर्थन सो मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने. लेकिन मनमुटाव के चलते 2 जून 1995 को बसपा ने सर्मथन वापसी की घोषणा कर दी सपा सरकार अल्पमत में आ गई. इससे नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने वो गेस्ट हाउस घेर लिया जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ठहरी हुई थीं. उनके साथ दुर्वयवहार किया गया हालात ये बने की सपा-बसपा का रिश्ता टूट गया. और जमकर दुश्मनी भी हुई.

इस बार नहीं दोहरा पाए करिश्मा
1993 के विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन ने बीजेपी को सत्ता से बाहर कर दिया था लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में ये गणित फेल हो गया. इश बार बसपा के जहां 0 से बढ़कर10 सीट मिली हैं वहीं सपा को केवल 5 सीट मिली हैं 2014 के चुनाव में भी सपा के पास 5 सीटें थीं.

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