अयोध्या: राममंदिर को लेकर अगर अयोध्या के पुराने अध्याय पलटे जाएं तो लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती ये वो तमाम नाम हैं जो अयोध्या के अध्याय पर सबसे आगे नजर आते हैं. लोग इन्हें अयोध्या आंदोलन का नायक कहते हैं. लेकिन अब इसे वक्त का तकाजा कहें या पार्टी में बदली बिसात हालात ये हैं कि, राम मंदिर के लिए अपना सबकुछ लगा देने वाले इन नायकों को अयोध्या में राम मंदिर के इतने बड़े समारोह में एक अदद निमंत्रण कार्ड तक नहीं मिला है.
उमा भारती बोलीं ‘राम मंदिर बपौती नहीं’
राम मंदिर आंदोलन का बड़ा चेहरा रहीं उमा भारती को 5अगस्त के प्रोग्राम का निमंत्रण ना मिलने के कारण मीडिया के माइकों पर झलक ही गया. उमा भारती इन दिनों अयोध्या में हैं लेकिन उन्हें 5 तारीख के राम मंदिर भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता नहीं मिला है. इस पर उमा भारती ने कहा कि, अयोध्या और राम मंदिर बीजेपी की बपौती नहीं है, राम सबके हैं. राम के नाम के अधिकार को रोकने का हम अहंकार पाल लेंगे तो हम भूल रहें हैं कि, हमारा भी अंत होना है.
अंतिम समय पर कटा कल्याण सिंह का नाम
राम मंदिर के लिए अपनी सरकार तक गवां देने वाले कल्याण सिंह ने ये कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि, जब राम मंदिर के लिए पंडाल सजेगा तो उनके लिए जगह नहीं मिल पाएगी. बता दें कि, भूमि पूजन की तारीख तय होने के बाद से ही कल्याण सिंह बेहद खुश नजर आ रहे थे. अपने बयान में कल्याण सिंह ने कहा था कि, मैं अब सुकून से मर सकूंगा वहीं अयोध्या जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि, में 4 तारीख की शाम को ही अयोध्या पहुंच जाउंगा लेकिन 3 तारीख को विहिप के नेता और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की पीसी के बाद साफ हो गया कि, कल्याण सिंह को भूमिपूजन के कार्यक्रम का न्योता नहीं मिला है.
आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी को भी निमंत्रण नहीं
राम मंदिर के लिए निकली आडवाणी की रथयात्रा को भला कौन भूल सकता है. अयोध्या आंदोलन के सबसे बड़े नायक लाल कृष्ण आडवाणी को भी अयोध्या के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण नहीं मिला है. उनके सहयोगी और वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी भी इस भूमि पूजन कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रहेंगे।
ट्रस्ट की दलील…
ट्रस्ट के अनुसार आयु अधिक होने के कारण भीड़ में न आने का अनुरोध किया गया है. कोरोना के मामलों को देखते हुए उन्हें अयोध्या आने का निमंत्रण नहीं दिया गया है. लेकिन ट्रस्ट की ये दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है क्योंकि, एक ओर जहांं पीएम मोदी भी 60 साल से उपर हैं वहीं उत्तर प्रदेश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 70 साल से अधिक हैं. साध्वी ऋतंभरा के गुरु स्वामी परमानंद गिरी तो करीब 84 साल के हैं और उन्हें अयोध्या में भूमि पूजन के कार्यक्रम का निमंत्रण दिया गया है और वो उस कार्यक्रम में शामिल भी होंगे.
