सपा-बसपा के प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी बनी निशाना, माया ने कहा- गठबंधन दोनों ‘गुरू-चेला’ की नींद उड़ा देगी

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लखनऊ : लोकसभा चुनाव में बीजेपी को शिकस्त देने की ऐसी धुन चढ़ी है कि 2 धुरविरोधी पार्टियां अब मैदान में एक साथ उतरने को तैयार हैं और साथ लड़ते हुए मौजूदा समय की सबसे बड़ी पार्टी को हराने का माद्दा रखते हैं. दरअसल, 25 साल पहले जो साथ छूट गया था वो आज जुड़ गया. हम बात कर रहे हैं सपा-बसपा के गठबंधन की जिसका ऐलान दोनों पार्टियों ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया.

पीएम मोदी और अमित शाह को बनाया निशाना
लखनऊ के एक होटल में बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर इस बात की पुष्टि की और इस बारे में विस्तार से बात की. सबसे पहले मायावती ने कहा कि सपा-बसपा की ये संयुक्त प्रेस वार्ता बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ‘गुरू-चेला’ की नींद उड़ा देगी.

25 साल पहले का किया जिक्र
उन्होंने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि “आज से 25 साल पहले भी सपा-बसपा के एक होने की कोशिशें हुई थीं. जिसका अंत गेस्ट हाउस कांड की घटना के रूप में हुआ है. लेकिन देश और समाज के हित के लिए हमने उस घटना को पीछे छोड़ दिया है.” इसके बाद मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस को घेरे में लिया और कहा कि “बीजेपी और कांग्रेस की नीतियां एक जैसी हैं. कांग्रेस के शासनकाल में घोषित इमरजेंसी थी जबकि भाजपा के शासन काल में अघोषित इमरजेंसी है. बोफोर्स घोटाले के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई. राफेल के कारण भाजपा की सरकार चली जाएगी.”

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सीबीआई छापों का भी हुआ जिक्र
मायावती ने कहा कि बीजेपी, सपा-बसपा गठबंधन से बुरी तरह डरी हुई है और इसी वजह से अखिलेश यादव के पीछे सीबीआई को लगा दिया लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि ऐसी किसी भी कोशिश से गठबंधन में मजबूती ही आएगी.

इसके आखिरकार वो घड़ी आ ही गयी जिसका आज सुबह से ही इंतजार किया जा रहा था. बीएसपी प्रमुख ने एलान किया कि आने वाले लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस के लिए गठबंधन न होते हुए भी अमेठी और रायबरेली की सीट छोड़ दी गयी है. दो सीटों दूसरी पार्टियों को दी जाएगी.

बबुआ ने बुआ को कहा धन्यवाद
इस मौके सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पत्रकारों को संबोधित किया और कहा कि “गठबंधन के लिए मायावती जी का धन्यवाद और इसे स्वीकार करने के लिए जनता को भी आभार. पूरे देश में अराजकता का माहौल है. बीजेपी के 5 साल के कार्यकाल में दलितों, पिछड़ों और महिलाओं पर अत्याचार किया गया और इन्हीं अत्याचारों को रोकने के लिए यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन का फैसला लिया है.”

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि “मैंने पहले ही बोला था कि अगर भाजपा को रोकने के लिए हमें दो कदम पीछे भी हटना पड़े तो हम हटेंगे, लेकिन मायावती जी ने बराबरी का समझौता कर हमें सम्मान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर मेरी आवाज भाजपा के लोगों तक पहुंच रही है तो वह ये सुन लें कि सपा-बसपा ने भाजपा का सफाया करने का एलान कर लिया है.”

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