दिल्ली/लखनऊ: कोरोना के बाद जैसे-तैसे लोगों के काम धंधे पटरी पर आने शुरु ही हुए हैं कि, अब उसी पटरी पर महंगाई की मालगाड़ी भी तेजी से दौड़ रही है. इधर महंगाई की मार से पहले ही कराह रही जनता की जेब पर अब GST का भार भी आ पड़ा है. 18 जुलाई से लागू हुई GST की नई दरों के बाद महंगाई अब जेब के खाली होने से लेकर खाने की थाली तक जा पहुंची है क्योंकि, GST की जद में इस बार ज्यादातर खाने का सामान ही आया है।
कहां बढ़ी GST की दर…
GST दरों के इस बदलाव में कुछ सामानों पर मिल रही छूट को वापस ले लिया गया है तो वहीं कुछ सामानों पर जीएटी की दरों में इजाफा करने का फैसला किया है. GST पर मिलने वाली छूट को खत्म करने का मतलब है कि मछली, दही, पनीर, लस्सी, शहद, सूखा मखाना, सूखा सोयाबीन, मटर जैसे प्रोडक्ट के साथ-साथ गेहूं और अन्य अनाज पर अब 5 प्रतिशत GST लगेगा. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने GST की परिभाषा बताते हुए लिखा है कि, ‘GST मतलब गई सारी तन्ख्वाह’
5 के बजाएअब 18% GST
वहीं डिब्बा या पैकेट बंद और लेबल युक्त प्रोडक्ट्स पर 18 जुलाई से 18 फीसदी जीएसटी लगेगी. पहले इन सब पर केवल 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता था.सुरसा जैसी महंगाई में वैसे ही सबकुछ स्वाहा है…अब दाल रोटी के जुगाड़ में दिन रात मेहनत करने वाली आम जनता, करे तो क्या करे. रालोद वाले जयंत चौधरी का तंज है कि, ये सबका साथ, अपनों का विकास, अंधविश्वास!।
मिडिल क्लास की टूटेगी कमर
प्रिंटिंग/ड्राइंग इंक’, चाकू, ‘पेंसिल शार्पनर’, एलईडी लैंप, ड्राइंग और मार्किंग करने वाले उत्पादों पर 18 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. आमदनी कम और आसमान छूती महंगाई में बिगड़ा हुआ है बजट. घर-घर की यही कहानी है. वहीं वरुण गांधी ने इसकी तुलना राहत में आहत से की है।
विपक्ष भी है जिम्मेदार
GST की दरों से बढ़ी महंगाई पर विपक्षी दलों के खेमे से जमकर शोर सुनाई दे रहा है. लेकिन अहम बात ये है कि, जिस GST काउंसिल की बैठक में दरों को मंजूरी मिली.उस बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री या वित्तमंत्री शामिल थे. ऐसे में सवाल ये है कि, कांग्रेस, आप सहित विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने उस बैठक में इनका विरोध क्यों नहीं किया. 18 जुलाई से जो खाद्य पदार्थ और चीजें महंगी हुई है उसमें गैर बीजेपी शासित राज्यों ने विरोध क्यों नहीं किया।
