बुलंदशहर : कारगिल युद्ध के हीरो और परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव ने अपना उत्तर प्रदेश की टीम को बताया कि युद्ध सैनिक ही नहीं बल्कि देश का हर शख्स लड़ता है. सीमा पर युद्ध जरूर जवान लड़ता है, लेकिन देश का नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से युद्ध लड़ते हैं. बुलंदशहर के रहने वाले योगेंद्र यादव ने कारगिल युद्ध के मंजर को याद करते हुए बताया कि 18 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर दुश्मन घात लगाए बैठा था.
दुश्मन का खात्मा ही एक मसकद था
दुश्मनों ने कभी नहीं सोचा था,की वह यहां से जिंदा बचकर वापस जा पाएंगे, लेकिन वह यह भूल गए की भारत माता की धरती पर शेर और शेरनियां पैदा होती हैं. देश के जवान ऊंची पहाड़ियों को अपने खून से पावन कर ऊपर चढ़ते चले गए और दुश्मन का खात्मा किया. जवानों ने तोरोलिंग, टाइगर हिल, बटालिक और तरफ की चौटियों को फतह करते हुए विजय की गाथा लिखी. योगेंद्र यादव कहते हैं कि आज देश की तीनों सेनाएं बहुत मजबूत स्थिति में है और दुश्मनों की आंख निकलने में पूरी तरह सक्षम हैं.
बुलेट के साथ वालेट भी जरूरी
अगर देश के सैनिक में एक भी सांस बाकी है तो वह मरते दम तक मातृभूमि को छोड़ता नहीं हैं. चीन को लेकर योगेंद्र यादव ने कहा कि दुश्मन को हराने के लिए बुलेट के साथ वालेट की भी जरूरी होता है. हालांकि चीन को सबक सिखाने के लिए सरकार को ओर भी कदम उठाने की जरूरत है. कारगिल युद्ध के मंजर को याद करते हुए योगेंद्र यादव कहते हैं कि टाइगर हिल पर हम सात जवान दुश्मन से लोहा ले रहे थे, मैंने अपने 06 साथियों को अपने सामने खोया है. किसी के सिर में गोली लगी थी तो किसी के शरीर से खून की धार बह रही थी. मेरे शरीर मे भी 17 गोलियां मारी गई थी लेकिन भारत माता को मुझे बचाना था.
अपना उत्तर प्रदेश के लिए बुलंदशहर नीरज शर्मा की खबर
