नई दिल्लीः .अयोध्या (Ayodhya) में विवादित भूमि पर फैसले की आस जोह रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है. अयोध्या मामले (Ayodhya) पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सर्वोच्च न्यायाधीश रजन गंगोई ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि शिया बोर्ड की याचिका को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है. चीफ जस्टिस ने संविधान पीठ का फैसला पढ़ते हुए कहा कि सीता रसोई की पूजा भारत में अंग्रेजों के आने से पहले भी होती थी. खुदाई में किसी भी तरह के इस्लामिक ढाचे के सुबूत नहीं मिले है.
मंदिर होने के साक्ष्य
कोर्ट ने कहा कि ASI कि रिपोर्ट में 12वीं सदी में मंदिर होने के सुबूत मिले हैं.
आस्था पर किसी का भी मालिकाना हक नहीं है
कोर्ट ने फैसले में कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता. साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा.
1949 में रखी गईं मूर्तियां
अयोध्या मामले (Ayodhya case) पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई फैसला पढ़ रहे हैं. इस दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं. कोर्ट रूम में फैसले की कॉपी लाई गई, जिसके बाद फैसले की कॉपी पर सभी जजों ने दस्तखत किए.
अयोध्या में लागू है धारा 144
अयोध्या (Ayodhya case) में धारा 144 लागू है. साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. अयोध्या में अर्धसैनिक बलों के 4000 जवानों को तैनात किया गया है. अधिकारी ने बताया कि राज्यों को सभी संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि देश में कहीं भी कोई अप्रिय घटना न हो.
कानून व्यवस्था पर कड़ी नजर
अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने कानून व्यवस्था बनाए रखने में राज्य सरकार की सहायता के लिए उत्तर प्रदेश में अर्धसैनिक बलों की 40 कंपनियों (प्रत्येक में लगभग 100 कर्मी) को भी उतारा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने सभी मंत्रियों को अयोध्या फैसले के संबंध में अनावश्यक बयान देने से बचने के लिए भी कहा था.
