लखनऊ: सैफई परिवार में भले ही सियासी मतभेद हों लेकिन मनभेद नहीं दिखते हैं.और तो और रह-रहकर एक होने के योग भी लगातार बनते रहते हैं. अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) और शिवपाल यादव (Shivpal yadav) के होली से शुरू हुए एक होने के कयास अब चुनाव के करीब आते-आते और तेज होने लगे हैं. इधर समाजवादी पार्टी ने शिवपाल यादव (Shivpal yadav) पर फिर मेहरबानी दिखाई है. जिससे शिवपाल यादव (Shivpal yadav) की विधायकी पर लटक रही खतरे की तलवार भी हट ग है.
सपा ने वापस ली याचिका
दरअसल, समाजवादी पार्टी (SAMAJWADI PARTY) ने वो याचिका वापस ले ली है जिसमें उसने शिवपाल यादव (Shivpal yadav) की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. बता दें कि, सपा से अलग होने के बाद शिवपाल यादव (Shivpal yadav) ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी. शिवपाल यादव (Shivpal yadav) सपा के टिकट पर जसवंतनगर से विधायक बने थे. लिहाजा अलग पार्टी बनाने के बाद सपा ने शिवपाल यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी थी. नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी (RAMGOVIND CHAUDHARY) ने 4 सितंबर 2019 को शिवपाल यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की याचिका को वापसी दायर की थी. लेकिन फिर बदले घटनाक्रम में रामगोविंद चौधरी (RAMGOVIND CHAUDHARY) ने 23 मार्च 2020 को याचिका वापसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा था. अब नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी (RAMGOVIND CHAUDHARY) की याचिका वापसी की मांग को विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया है. यानि अब शिवपाल यादव (Shivpal yadav) की विधायकी बरकरार रहेगी.
साथ आने के लगने लगे कयास
इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में फिर से हलचल मच गई है. सपा के लचीले रूख को भविष्य क रूपरेखा के तौर पर देखा जा रहा है. राजनीत के जानकार कह रहे हैं कि, ये 2022 की झांकी है. चाचा-भतीजे दोनों को एक दूसरे की जरुरत है.
