लखनऊ: राजधानी लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में कमिश्नर सिस्टम की सफलता से और कानून व्यवस्था पर तमाम रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दो और जिलों में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने को मंजूरी दे दी है ।
इन दो जिलों में होगा लागू…
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे से लौट कर शाम को प्रदेश कैबिनेट की बैठक की. मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर आयोजित इस बैठक में फैसला लिया गया कि नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट की तरह की अब कानपुर और वाराणसी में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होगी।
क्यों लिया फैसला ?
दरअसल, नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुए एक साल पूरा हो गया है. इस दौरान कमिश्नरेट के परिणाम सकारात्मक रहे हैं. पुलिस को अधिकार मिले तो कानून-व्यवस्था बेहतर हुई. अपराधियों पर नकेल कसने में आसानी हुई और महिला अपराध में भी कमी आई. दोनों शहरों में बीते कई सालं की तुलना में 2020 में हर तरह के अपराध में कमी दर्ज की गई. इसके बाद कानपुर और वाराणसी में कमिश्नरेट लागू करने का खाका शासन तैयार कर लिया गया था।
इन जिलों में भी हो रहा विचार
अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था, अनुशासन और ट्रैफिक सुधार की वजह से पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को कामयाब बताया जा रहा है. इसे देखते हुए अब कुछ और शहरों में यह सिस्टम लागू करने पर भी विचार चल रहा है. इन जिलों के बाद प्रयागराज , बरेली , आगरा ,मेरठ और गोरखपुर के अगले चरण में लागू होने की संभावना है ।
IAS लॉबी में हंगामा !
कमिश्नरेट सिस्टम में IAS अधिकारी और IPS अधिकारियों में अधिकारों की लड़ाई रही है. दोनों खेमों में इसे वर्चस्व की लड़ाई भी कहा जाता है. नोएडा और लखनऊ में लागू हुए कमिश्नरी सिस्टम के वक्त भी सोशल मीडिया पर दोनों खेमों तनातनी देखने को मिली थी. अब एक के बाद एक जिलों में इस सिस्टम के लागू होने की कवायद में फिर कलह के बादल मंडराते दिख रहे हैं ।
