इस शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक लगाकर कामयाबी की प्रार्थन करेंगी बहनें

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नई दिल्ली : बहने छोटी हो या बड़ी, पास हो या दूर, दिल से सिर्फ अपने भाई की खुशहाली की कामना करती रहती है. उनके इस प्यार एवं श्रद्धा को और भी गहरा करता है भाई दूज का पर्व. इस साल बहनें भाई दूज का त्योहार 9 नवंबर को मनाने वाली हैं. ऐसे में हर बहन चाहती है कि उसके भाईया की उम्र सौ बरस हो और वो हर दुख से दूर रहे अगर आप भी ऐसी ही किसी कामना को दिल में छिपाए हुए हैं तो जान लें भाई को तिलक करने का क्या है सही तरीका जो आपकी इस कामना को पूरा कर सकता है.

भाई दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं. जिसेक बदले में भाई अपनी बहन को कुछ उपहार देता है. भैया दूज पर सबसे पहले यह जान लें कि टीका करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 17 मिनट तक है. इन दो घंटे और 8 मिनट की अवधि में भाई को तिलक लगाना बेहद शुभकारी होगा.

इस तरह करें बहने अपने भाई का पूजन
भैया दूज के दिन सबसे पहले नहाकर तैयार हो जाएं. उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें. शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें. सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें. अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें. इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं. शाम के समय यमराज के नाम का चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर जरूर लगाएं. मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे. भाई दूज पर तिलक करते समय यह मंत्र ज़रूर पढ़ें- गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें.

भाई दूज की कथा
भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था. उन्होंने यमराज और यमुना को जन्म दिया था. यमुना यमराज को बहुत प्रेम करती थी. वो अक्सर यमराज को घर आकर भोजन करने के लिए कहा करती थी, लेकिन यमराज सदैव उनकी बात को अनसुना कर देते थे. कार्तिक शुक्ल के दिन यमुना ने यमराज को अपने घर आकर भोजन करने का वचन लिया. यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं, इसलिए कोई भी मुझे अपने घर नहीं बुलाना चाहता. मुझे बहने के घर जाकर उनकी बात का मान रखना चाहिए. यमराज को घर आता देखकर यमुना बहुत खुश हुई. उसने भाई को प्रेमपूर्वक भोजन कराया. यमुना के अतिथि सत्कार से खुश होकर यमराज ने बहन से कोई वर मांगने को कहा.यमुना ने कहा कि भाई आप हर साल इस दिन मेरे घर आया करो. मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे. यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की. इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी. ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता. इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है.

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