कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी कहते हैं, देवों के उठने का पर्व. इस बार 15 नवंबर को देवोत्थान एकादशी एकादशी मनाई जा रही है. पौराणिक मान्यता है कि देवता कभी नहीं सोते वो हर पल अपने भक्तों के कल्याण के लिए जागते रहते हैं ,लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु वैशाख मास में हरि शयनी एकादशी से चार महीनों के लिए योगनिद्रा में जाकर कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं और उनके योगनिद्रा के चार महीनों में सभी मांगलिक कार्यों को विराम लग जाता है, लेकिन देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर सभी देवी देवता उनकी पूजा करते हैं और मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते हैं, उसी दिन श्री शालिग्राम जी संग माता तुलसी का विवाह भी किया जाता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवोत्थान एकादशी के दिन कुछ चीजों को करने की मनाही होती है. मान्यता है कि अगर गलती से भी इस दिन ये कार्य किए गए देवता रूठ जाते हैं और घर से सुख समृद्धि दूर हो जाती है.
आइए जानते हैं देवोत्थान एकादशी के दिन कौन से काम करने मना होते हैं…
– तुलसी के पत्ते तोड़ना
देवोत्थान एकादशी के दिन मां तुलसी और प्रभु शालीग्राम का विवाह होता है. इसलिए इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए.
– मांस-मदिरा का प्रयोग
कुछ लोगों का मानना होता है कि जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं सिर्फ वही सात्विक भोजन करते हैं, लेकिन ऐसा नही हैं. अगर आप व्रत नहीं रख रहे हैं तो इस दिन साधारण भोजन करना चाहिए. देवोत्थान एकादशी के दिन मांस और शराब के सेवन से बचना चाहिए.
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