लखनऊ: उत्तर प्रदेश के चुनावों पर छाई उपा-पोह की धुंध आखिरकार छंट ही गई. तीन दिन की मीटिंग, मंथन, जायजा और तमाम जांच पड़ताल के बाद चुनाव आयोग ने ओमिक्रॉन के चलते, चुनाव रद्द होने वाली चिंता को दूर करते हुए साफ कर दिया कि, चुनाव होंगे और तय समय पर होंगे. यानि, गेंद अब राजनीतिक दलों के पाले में हैं. नियमों का पालन इन्ही को करना और कराना होगा।
क्या बात हुई?
हालांकि, कोरोना के कहर और भीड़ के भंवर में कुछ राजनीतिक दल कम रैलियां करने पर राजी हैं. कोरोना के कारण करीब 11 हजार पोलिंग बूथ भी बढ़ाए जाएंगे. 15 करोड़ से ज्यादा के मतदाताओं वाले सूबे में खास बात ये कि, साइलेंट वोटर कही जाने वाले महिला मतदाताओं की तादात पुरुषों के मुकाबले 5 लाख ज्यादा है. इसलिए इस बार यूपी में 800 महिला स्पेशल पोलिंग बूथ भी बनाए जाएंगे।
UP में तय समय पर चुनाव होंगे: चुनाव आयोग
चुनाव में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन होगा
कई दल रैलियां कम करने के पक्ष में हैं
यूपा में 15.02 करोड़ मतदाता
पुरुषों के मुकाबले 5 लाख महिला वोटर ज्यादा हैं
5 जनवरी को फाइनल वोटर लिस्ट आएगी
लिस्ट आने के बाद नाम जोड़े जा सकेंगे
1250 मतदाताओं पर एक बूथ होगा
पहली बार घर से वोट देने की सुविधा
बुजुर्ग-दिव्यांगों को घर से वोट देने की सुविधा
यूपी में 800 महिला स्पेशल पोलिंग बूथ होंगे
मतदान का समय 1 घंटा ज्यादा रहेगा
चुनाव में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन होगा
कई दल रैलियां कम करने के पक्ष में हैं
यूपा में 15.02 करोड़ मतदाता
पुरुषों के मुकाबले 5 लाख महिला वोटर ज्यादा हैं
5 जनवरी को फाइनल वोटर लिस्ट आएगी
लिस्ट आने के बाद नाम जोड़े जा सकेंगे
1250 मतदाताओं पर एक बूथ होगा
पहली बार घर से वोट देने की सुविधा
बुजुर्ग-दिव्यांगों को घर से वोट देने की सुविधा
यूपी में 800 महिला स्पेशल पोलिंग बूथ होंगे
मतदान का समय 1 घंटा ज्यादा रहेगा
ऐसा पहली बार…
वोटर लिस्ट को लेकर भी सियासी दलों में घमासान मचा है. विपक्ष कई बार वोटर लिस्ट से तमाम नाम काटे जाने का आरोप लगाता रहा है. ऐसे में आयोग की माने तो निराधार हैं ये सब आरोप, इस बार यूपी में 52 लाख से ज्यादा नए वोटर्स हैं. वैसे भी 5 जनवरी तक आ जाएगी फाइनल वोटर लिस्ट उसके बाद भी जोड़े जा सकतें हैं बचे हुए नाम. अहम बात ये कि, बुजुर्ग और दिव्याग घर से भी कर सकेंगे मतदान और ऐसा पहली बार हो रहा है।
दागियों को बताने होंगे ‘कारनामे’ !
वहीं हर चुनाव की तरह इस बार भी चुनाव आयोग ने बिना लोभ, लालच और मोह के चुनावी मुहिम का मंत्र दिया है. राजनीतिक में अपराधीकरण पर आय़ोग ने एक और लकीर खींची हैं. क्रिमिनल बैकग्राउंड के उम्मीदवारों को टीवी-अखबार में बताने होंगे अपने ‘कारनामे’ अबकी बार केवल ‘जिताऊ’ वाली दलील किसी भी दल की नहीं चलेगी. आयोग के इस ऐलान के बाद, इम्तिहान अब तमाम सियासी दलों का है. क्योंकि, चुनाव भी कराना है और जनता को ओमिक्रॉन से भी बचाना है. इसलिए सवाल ये है कि, क्या कसौटी पर खरे उतर पाएंगे सियासी दल. क्या राजनीति में अपराधीकरण से परहेज कर पाएंगे सियासी दल?
