UP बजट सत्र का आगाज हंगामेदार , सपा विधायकों का अनोखा अवतार उर्दू पर योगी के बयान पर सियासी रार!

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लखनऊ: किसी ने अस्थि कलश पकड़ा…किसी ने खुद को जंजीरों में जकड़ा…किसी के हाथ में तख्ती तो किसी के पोस्टर पर विरोध की पंक्ति…उत्तर प्रदेश की विधानसभा का ये वो नजारा है जो के बजट सत्र के पहले ही दिन दिखाई दिया…मेरठ ( Meerut ) सरधना से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ( Atul Pradhan ) सबसे अलग अंदाज में दिखाई दिए, अमेरिका से भेजे गए अवैध अप्रवासी भारतीयों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर अतुल प्रधान खुद को जंजीरों में जकड़ कर विधानसभा पहुंचे और सरकार पर निशाना साधा

राज्यपाल अभिभाषण पूरा नहीं कर पाईं
भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच शुरु हुए यूपी विधानसभा के इस बजट सत्र में राज्यपाल भी अपना अभिभाषण पूरा नहीं कर पाईं…राज्यपाल गो बैक सरीखे नारों के बीच उनको अपना अभिभाषण करीब 8 मिनट में ही खत्म करना पड़ा…महाकुंभ, पेपर लीक, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दे के जरिए समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार को कठघेरे में खड़ा करने की कोशिश की…हालांकि, राज्यपाल के अधूरे भाषण पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय (Mata Prasad Pandey ) ने कहा कि, महामहिम राज्यपाल महाकुंभ की घटना से परेशान थीं इसलिए सरकार के झूठ को नहीं पढ़ना चाहती थीं

उर्दू और कठमुल्ले पर सियासी कलह
योगी सरकार ने सदन में हिंदी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी सदन में अपनी बात रखने की मांग करी, इस पर सदन की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, अगर अंग्रेजी को फ्लोर लैंग्वेज कर रहे हैं तो फिर उर्दू को भी कर दीजिए. क्योंकि, गांव से आए कितने लोग अंग्रेजी समझेंगे….बस फिर क्या प्रदेश की बोलियों के विरोध पर विधानसभा में बवाल मच गया…भोजपुरी, अवधी, ब्रज और बुंदेलखंडी के सपाई विरोध पर सीएम योगी ( CM Yogi ) ने मोर्चा संभाला तो बात दोहरे चरित्र तक आ गई…और तो और उर्दू-अंग्रेजी पर भी सियासी अखाड़ा सज गया…।

ये भी देखें:   https://www.youtube.com/shorts/5LRq-RwZbXk

स्थगित हो गई सदन
तमाम मुद्दों की तस्वीर और तीखी तासीर में स्थगित हो गया सदन…लेकिन वार-पलटवार और तकरार का सिलसिला जारी रहा….आरोप-प्रत्यारोप में एक दूसरे पर निशाना साधा गया… 18 फरवरी से शुरु हुए इस बजट सत्र में 20 फरवरी को बजट पेश होना है, कुल मिलाकर सूबे के लिए तमाम संभावनाओं का है ये बजट सत्र…लेकिन पहले ही दिन के इस बवाल पर सवाल ये है कि, बहस और चर्चा के बजाए केवल और केवल विरोध क्यों…?

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