प्रयागराज : त्रिवेणी के तट पर जल साधना से पहले मिट्टी का लेप लगाया जाता है. लेप लगाकर बाबा मां गंगा की गोद में बैठा जाता है. सूर्य नमस्कार कर जल साधना की अंतिम विधी पूरी की जाती है. जिसके बाद पानी में उल्टा तैरकर बाबा जल साधना में लीन हो जाते हैं.
बाबा की जल साधना
पानी में तैरकर जल साधना करना आसान नहीं. मगर नागा बाबाओं के लिए ये साधना की एक आसान क्रिया है. प्रयागराज में कुंभ मेला शुरु हो चुका है. लंबी-लंबी जटा औघड़ रुप और कड़कड़ाती ठंड में कपड़े का एक भी तिनका शरीर पर ना लपेटे हुए हजारों नागा बाबा कुंभ मेले में नजर आएंगे. इन्ही में कुछ ऐसे बाबा हैं जो संगम में जल साधना करने आते हैं.
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उल्टा तैरकर कई किलोमीटर तक सफर
आमतौर पर संगम किनारे साधना में लीन बाबा दिखाई देंगे लेकिन कुछ ऐसे बाबा होते हैं जो जल साधना के लिए पानी में उल्टा तैरकर कई किलोमीटर दूर तक चले जाते हैं. लेकिन जल साधना से पहले ये बाबा अपने शरीर पर मिट्टी का लेप लगाते हैं. उसके बाद गंगा में बैठकर सूर्य को जल अर्पित करते हैं. सूरज को जलाभिषेक करने के बाद बाबा जल साधना में डूब जाते हैं.

तीन बार करते हैं गंगा स्नान
कुंभ में नागा सन्यासी तीन बार गंगा में स्नान कर साधना करते हैं और फिर रात की मुख्य पूजा करते हैं कहा जाता है नागा साधु 24-24 घंटे तक जाप करते हैं.
