बच्चों की पढ़ाई में माता-पिता का योगदान भी अहम होता है. अपने बच्चों को समझें, पढ़ाएं और उनकी मदद करें. इसमें केवल बच्चे को पढ़ने के लिए कहना और डांटना ही शामिल नहीं होता, बल्कि एक ऐसा दोस्त बनना पड़ता है, जो बच्चे को उससे ज्यादा समझे. आप इन टिप्स की मदद से पढ़ाई में साथ देकर बच्चे के मददगार बन सकते हैं.
काफी सारे स्कूल बच्चों के माता-पिता को भी उसकी प्रोग्रेस देखने के लिए बुलाते हैं. बच्चों का दाखिला ही अच्छे स्कूल में करवाना काफी नहीं होता, उनके स्कूल से भी जुड़े रहना चाहिए. बेहतर होगा अगर आप बच्चे को स्कूल छोड़ने या छुट्टी के बाद लेने जाए.
बच्चा जब स्कूल जाना शुरू करता है तो अध्यापक उसकी क्षमताओं का आकलन कर उसे पढ़ाते हैं. जरूरी है कि बच्चे की पढ़ाई से जुड़ी बातें जानने के लिए आप उसके टीचर्स से मिलते रहें.
दफ्तर से काम करने के बाद आप थक चुके हों लेकिन बच्चा क्या कर रहा है यह देखने के लिए मुस्कराकर उससे मिलना जरूर चाहिए. अगर आप बच्चे से बातें करेंगे तभी वह आपसे बातें शेयर कर पाएगा.
बैग चेक करने का मतलब यह नहीं है कि कहीं उसमें कुछ रखा तो नहीं है, इसका मतलब है बच्चे के होमवर्क, क्लास में पढ़ाई गई बातों और डायरी देखें. टीचर ने उसको क्या रिमार्क्स दिए हैं, यह भी देखें. आप इस बारे में बच्चे से बात भी कर सकते हैं.
बच्चा पढ़ने में मन लगाए तो दूसरों के सामने भी उसकी तारीफ करने में न कतराएं. रिजल्ट में नंबर अच्छे हों तो उसकी पीठ थपथपाएं और न हों तो भी उससे यह कहें कि वह बेहतर कर सकता था.
आप हर समय बच्चे से पढ़ाई की बातें ही करेंगे तो वह इससे चिढ़ने लगेगा. उसके खेल का वक्त तय करें, उससे खेलने को कहें और पढ़ाई से जुड़ी बातों के अलावा भी उसकी सुनें. बच्चों का अध्यापक बनने से अच्छा है कि उनके दोस्त बनें. इससे आप उनके अच्छे काम पर तारीफ करने के अलावा कमियों पर भी बात कर पाएंगे.
