विद्या देवी मां सरस्वती की पाना है कृपा, तो पूजा में जरूर करें इन मंत्रों का उच्चारण

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मौसम का मिजाज़ बदल रहा है, ठंड गुलाबी हो गयी है और सूरज की रोशनी में हल्की तपिश होनी शुरू हो गयी है वैसे ये बसंत पंचमी की आहट है. ये दिन मां सरस्वती की कृपा पाने का बेहद खास दिन है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वकी की पूजा आराधना से विद्या और ज्ञान का विशेष वरदान मिलता है तो आईए जानते हैं कि क्या है बसंत पंचमी और इसकी महिमा.

बसंत को ऋतुओं का राजा माना जाता है और बसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन का सूचक है. वहीं, कुंभ मेले में अगला स्नान 10 फरवरी के दिन है 10 फरवरी को तीसरे शाही के दिन बसंत पंचमी का खास दिन है. इस दिन पूरे देश में बसंत पंचमी मनायी जाएगी. मान्यता है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या के बाद तीसरे शाही स्नान बसंत पंचमी पर भी त्रिवेणी स्नान करता है. उसे पूर्ण कुम्भ का फल मिलता है. बसंत पंचमी के पर्व पर ब्रह्म मुहूर्त में 10 बजकर 09 मिनट तक विशेष मुहूर्त में गणपति और विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन कर त्रिवेणी संगम में विद्यमान अदृश्य सरस्वती, गंगा और यमुना सहित तीर्थराज प्रयाग का स्मरण कर डुबकी लगाने वाला व्यक्ति महापुण्य का भागी बनता है.

मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. इसी वजह से शिक्षा की देवी मानी जाने वाली मां सरस्वती की स्कूलों और शिक्षा संस्थानों में खास पूजा बन्दना की जाती है. धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रयाग में सरस्वती अदृश्य रूप से विद्यमान हैं, यहां स्नान करने से सरस्वती के जितने जलकण स्नान के समय शरीर को स्पर्श करते हैं उतने ही समय तक मनुष्य स्वर्ग में वास करता है. सरस्वती पुण्य प्रदायनी, पुण्य की जननी और पवित्र तीर्थ स्वरूपा हैं.

पाप रूपी अज्ञान की लकड़ी को जलाने के लिए ये अग्निस्वरूपा है. माघ महीने की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी होती है और इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है. कई तरह के मनमोहक फूलों से धरती प्राकृतिक रुप से संवर जाती है. खेतों में सरसो के पीले फूलों की चादर बिछी होती है और कोयल के कूकू से दसो दिशाएं गूंजायेमान रहती हैं. इस दिन सरस्वती पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन मां सरस्वती देवी के समक्ष नील सरस्वती स्त्रोत का पाठ करना चाहिए. इससे मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है क्योंकि इस दिन मां सरस्वती की पूजा से ज्ञान और विद्या का खास वरदान मिलता है. बसंत पंचमी के इस दिन को कई तरह से मनाया जाता है. इस दिन से मथुरा में मौजूद बांकेबिहारी के मंदिरों में गुलाल से होली खेलने का उत्सव शुरू हो जाता है.

बसंत पंचमी के दिन बंगाल में बूंदी के लड्डू और मीठा भात चढ़ाया जाता है. बिहार में मालपुआ, खीर और बूंदी मां सरस्वती को चढ़ाया जाता और पंजाब में मक्केक की रोटी के साथ सरसों साग और मीठा चावल चढ़ाया जाता है. इस खास दिन पिले कलर का वस्त्र धारण किया जाता है तो इस बसंत पंचमी आप भी अपने बुद्धि विद्या को बढ़ाने के लिए मां सरस्वती की आराधना करें.

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