नई दिल्ली : दिल्ली से सटी गाजियाबाद देश की वीवीआईपी सीटों में गिनी जाती है, ऐसे में हर सियासी पार्टी की नजर इस सीट पर कब्जा करने की होती है, पश्चिम उत्तर-प्रदेश की इस सीट को सेंटर कहा जाता हैं,
क्या है गाजियाबाद लोकसभा सीट का इतिहास
गाजियाबाद लोकसभा सीट काफी नई है. यहां सिर्फ दो बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, 2009 में पहली दफा और 2014 में दूसरी बार यहां लोकसभा चुनाव हुए, हालांकि दोनों बार इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा, 2009 में बीजेपी से राजनाथ सिंह जीते थे और दूसरी बार पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह जीते हैं.
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क्या कहता है गाजियाबाद लोकसभा सीट का समीकरण
वोटरों की संख्या के हिसाब से देखे तों 2014 में यहां करीब 23 लाख से अधिक वोटर थे, इनमें 13 लाख पुरुष और 10 लाख महिला वोटर रहीं. 2014 में यहां पर 56 फीसदी ही मतदान हुआ था. इनमें 6000 से अधिक वोट NOTA में डाले गए थे.
मुस्लिम वोटर भी काफी प्रभावशाली
यहां मुस्लिम की संख्या भी ठीक ठाक है, गाजियाबाद में मुस्लिम जनसंख्या 25 फीसदी से अधिक है, लिहाजा ऐसे में मुस्लिम वोटरों का भी काफी गहरा प्रभाव है.
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गाजियाबाद लोकसभा के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें
गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद और धोलाना जैसी सीटें शामिल हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इनमें से सिर्फ धोलाना सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थी, जबकि अन्य सभी 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था.
2014 में मोदी लहर ने किया विरोधियों का काम-तमाम
पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर ने विरोधियों को बिखेर दिया था. सेना से रिटायर होकर भारतीय जनता पार्टी में आए जनरल वीके सिंह ने इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से किस्मत आजमाई तो उन्हें आधी से अधिक वोट मिली. 2014 में गाजियाबाद से बड़ी जीत हासिल करने का ईनाम वीके सिंह को केंद्र सरकार में मंत्री बनकर मिला.
