नई दिल्ली : उत्तर-प्रदेश की वीवीआईपी सीटों में से एक मेरठ पर सभी पार्टियों की नजर रहती है, लेकिन बीते 2 दशक से ये सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है, 2009 और 2014 के चुनाव में बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल यहां से लगातार दो बार सांसद रहे हैं, ऐसे में तीसरी बार जीतकर हैट्रीक बनाने के दवाब उनके ऊपर है,
पिछली बार यहीं से चुनाव प्रचार शुरु हुआ था
2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहली चुनावी रैली मेरठ में ही की थी, उस वक्त मेरठ की रैली में करीब 20 लाख से ज्यादा की भीड़ जुटी थी, जिससे पूरे प्रदेश में बड़ा संदेश गया था, अब इस बार भी पीएम मोदी यूपी में यहीं से चुनावी अभियान शुरु करने जा रहे हैं.
क्या है मेरठ लोकसभा सीट का इतिहास
1951 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस पार्टी ने परचम लहराया था, लेकिन 1967 में सोशलिस्ट पार्टी ने कांग्रेस को मात दी. 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने बाजी मारी, लेकिन उसके अगले चुनाव में इमरजेंसी के खिलाफ चली लहर जनता पार्टी के हक में गई. हालांकि, 1980, 1984 में कांग्रेस की ओर से मोहसिना किदवई और 1989 में जनता पार्टी ने ये सीट जीती. 1990 के दौर में देश में चला राम मंदिर आंदोलन का मेरठ में सीधा असर दिखा और इसी के बाद ये सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बन गई. 1991, 1996 और फिर 1998 में यहां से लगातार भारतीय जनता पार्टी के दबंग नेता अमरपाल सिंह ने जीत दर्ज की. उसके बाद 1999, 2004 में क्रमश कांग्रेस और बसपा ने यहां से बाजी मारी. हालांकि, 2009 और 2014 में फिर यहां भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराया.
मेरठ लोकसभा सीट का समीकरण
2011 के आंकड़ों के अनुसार मेरठ की आबादी करीब 35 लाख है, इनमें 65 फीसदी हिंदू, 36 फीसदी मुस्लिम आबादी हैं. मेरठ में कुल वोटरों की संख्या 1964388, इसमें 55.09 फीसदी पुरुष और 44.91 फीसदी महिला वोटर हैं. 2014 में यहां मतदान का प्रतिशत 63.12 फीसदी रहा. मेरठ लोकसभा के साथ हापुड़ का कुछ क्षेत्र भी जुड़ता है, कुल मिलाकर यहां 5 विधानसभा क्षेत्र हैं. इनमें किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण और हापुड़ की सीट है. 2017 के लोकसभा चुनाव में इनमें मेरठ शहर समाजवादी पार्टी तथा अन्य विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं.
एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब ‘अपना उत्तर प्रदेश’ WhatsApp
