लखनऊ: देर से ही सही लेकिन अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी की ओवरहॉलिग की तैयारी कर ली है. लोकसभा चुनाव परिणाम के करीब ढाई महीने बाद समाजवादी पार्टी में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी में उपर से लेकर नीचे तक बड़े पैमाने पर ‘स्वच्छता’ (फेरबदल ) अभियान चलेगा.
संगठन के नए सिपहसलार और नए प्रवक्ताओं की घोषणा!
इस फेरबदल के जरिए समाजवादी पार्टी में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है. ये बदलाव ऊपर से लेकर निचले स्तर तक देखने को मिलेगा. इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी में प्रवक्ताओं के नए नामों की घोषणा भी हो सकती है. बता दें कि, लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया पैनल को भंग कर दिया था.
‘जिसको जाना है जल्दी जाओ’
बीते कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के कई नेता और राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर जा चुके हैं. कई और नेताओं के सुर इन दिनों कुछ बदले-बदले से हैं. इन हालात के बीच सूत्रों की खबर है कि, पिछले दिनों की एक मीटिंग में अखिलेश यादव ने साफ कह दिया था कि, जिसको जाना है वो जल्दी चला जाए ताकि, हम अपने विश्वासपात्र और एक अच्छी टीम के साथ फिर से लड़ने की तैयारी कर सके. वहीं इस फेरबदल को लेकर कहा जा रहा है कि, उन नॉन परफॉर्मर नेताओं को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है जो प्रदर्शन में जीरो हैं और पार्टी पर बोझ बने हैं. दरअसल, लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद अखिलेश यादव की खामोशी पर तमाम सवाल उठ रहे थे. हालांकि, उन्नाव रेप पीड़िता के मामले को उठाने और संसद में अखिलेश यादव और आजम खान के मुखर होने से पार्टी में नई उर्जा का संचार दिखा.
लोकसभा चुनाव में केवल 5 सीट मिलीं परिवार के सदस्य भी हारे
बसपा से गठबंधन के बावजूद समाजवादी पार्टी को लोकसभा में वो परिणाम नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी. इस चुनाव में उन्हें महज 5 सीटें मिली थी और यादव परिवार के तीन सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा था.
अब उपचुनाव है बड़ी परीक्षा
लोकसभा चुनाव के बाद बसपा के साथ वाला गठबंधन टूट चुका है. ऐसे में समाजवादी पार्टी के सामने अब पहली और बड़ी परीक्षा है उपचुनाव. नवंबर में प्रदेश की 13 सीटों पर उपचुनाव होना है. बसपा भी इस उपचुनाव में उतरने का ऐलान कर चुकी है ऐसे में अखिलेश यादव के लिए ये उपचुनाव अग्निपरीक्षा है. क्योंकि, समाजवादी पार्टी का लक्ष्य केवल बीजेपी को हराना नहीं बल्कि बसपा से ज्यादा सीटें लाना होगा. ताकि, प्रदेश में अपना वर्चस्व कायम रखा जा सके.
