लखनऊ: अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह सीबीआई की विशेष अदालत में पेश हुए. 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. इस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमाभारती समेत कुल 21 नेताओं पर आरोप लगा था. सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केस चलाने की अनुमति दी थी. 19 अप्रैल 2017 को यह अनुमति दी गई थी. उस वक्त कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल थे. इसलिए उनपर मामला नहीं चलाया जा सकता था. पिछले महीने राज्यपाल पद से हटने के बाद कल्याण सिंह को सीबीआई ने पेशी के लिए समन जारी किया था. इस मामले में कल्याण सिंह को छोड़कर सभी आरोपी जमानत पर हैं.
क्या है पूरा मामला?
देश की सबसे अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने 19 अप्रेल 2017 को बाबरी विध्वंश (Babri) मामले में बीजेपी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती (Uma bharti) के खिलाफ आपराधिक साजिश के मामले को फिर से बहाल करने के आदेश दिए थे. उस घटना के वक्त कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे लिहाजा उन पर भी आरोप था इस मामले में आडवाणी मुरली मनोहर जोशी और उमाभारती कोर्ट में हाजिर हुए थे लेकिन राज्यपाल होने के चलते कल्याण सिंह को छूट मिल गई थीं.
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई द्वारा दर्ज मुकदमें के मुताबिक कल्याण सिंह (Kalyan Singh) घटना के वक्त सीएम थे और उन्होंने राष्ट्रीय एकता परिषद वादा किया था कि, ढांचे को ढहाने नहीं देंगे बावजूद इसके वादे के विपरित ऐसा हुआ और कल्याण सिंह ने सीएम रहते केंद्रीय बल इस्तेमाल करने का आदेश भी नहीं दिया था. सीबीआई का आरोप है कि, प्रथम दृश्यता वो इस साजिश में शामिल थे और उन्होंने अगले दिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
