नईदिल्ली/अमेठी: आयरन लेडी कही जाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज पुण्यतिथि है. पूरा देश उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित रहा है. उस आयरन लेडी ने तमाम किदवंतियों को अपने बड़े कार्यों से छोटा कर दिया दिखाया. सॉफ्ट और ‘गुड़िया’ समझने वालों को ‘दुर्गा’ वाला रुप भी दिखाया था. इंदिरा गांधी ने तमाम सपनों को शिद्दत से पूरा भी किया लेकिन इंदिरा गांधी ने जो एक अनूठा सपना संजोया था उसका नाम है अमेठी.
अमेठी और गांधी परिवार
गांधी-नेहरू परिवार और अमेठी आज एक दूसरे के पूरक हैं. इस रिश्ते को जोड़ने की पहली कड़ी इंदिरा गांधी ही बनी थीं. अमेठी के राजपरिवार और नेहरू परिवार में भी घनिष्ठ संबंध रहे. यानि, गांधी-नेहरू परिवार का राजनीतिक रिश्ता जुड़ने से पहले भी इंदिरा गांधी अमेठी आती रहती थीं. फिर 1976 में संजय गांधी ने अमेठी से अपनी सियासी पारी शुरु की तो इंदिरा गांधी के लिए अमेठी घर जैसा हो गया. अमेठी के साथ ही रायबरेली को इंदिरा ने अपनी सियासी कर्मभूमि बना लिया. अब सोनिया गांधी उनकी सियासी विरासत को संभालती रही हैं.
इंदिरा गांधी का सपना ‘अमेठी’
अमेठी के अस्तित्व में इंदिरा गांधी की बहुत सारी यादों का बसेरा है. उन्होंने एक नई अमेठी का सपना सजाया था. इस सपने को हकीकत में बदलते हुए उन्होंने अमेठी को नवरत्न कंपनियों से जोड़कर दुनिया में पहचान भी दिलाई. HAL, BHEL से लेकर इंडोगल्फ कंपनियों की नींव खुद इंदिरा गांधी ने रखी थी. लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संजय गांधी अस्पताल की बुनियाद उन्होंने रखी थीं .ये सब इंदिरा गांधी की अमेठी के अवशेष स्मृतियां है. जो आज भी इंदिरा गांधी की याद दिलाती हैं. यही योजनाएं अमेठी के विकास में चार चांद लगाती हैं.
बुरे वक्त में भी अमेठी को नहीं भूलीं इंदिरा गांधी
संजय गांधी अमेठी में लगातार सक्रिय रहे. दिल्ली से संजय गांधी अमेठी जाते तो पूरे इलाके में जश्न जैसा माहौल होता था. उस समय अमेठी के गांवों शहर से जोड़न का काम शुरु हुआ. गांव की कच्ची पगडंडियों ने पहली बार तारकोल की सड़क देखी. विकास की बयार अमेठी में तब बहनी शुरु हुई थी. लेकिन संजय गांधी की मौत ने अमेठी को गहरा दुख दे दिया. तब लगा था कि, अब गांधी-नेहरू परिवार का अमेठी से रिश्ता खत्म हो जायेगा. लेकिन इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी को यहां से चुनाव में उतारकर अमेठी के प्रेम को फिर अटूट कर दिया. अमेठी के विकास के अच्छे दिन राजीव गांधी के समय में शुरू हुए. राजीव गांधी ने यहां नवरत्न कंपनियों की शुरुआत की थी.
इंदिरा गांधी की मौत पर रोई थी ‘अमेठी’
अमेठी से इंदिरा गांधी का लगाव जग-जाहिर था. 1 नवंबर 1984 को इंदिरा गांधी को कांग्रेस के बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने गौरीगंज के कहार गांव आना था. लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था. वो तो नहीं आ पाईं उससे पहले उनकी मौत की खबर ने देश के साथ-साथ अमेठी को भी रुला दिया. अमेठी इंदिरा गांधी का सपना था, तो लोग भी इंदिरागांधी को आधुनिक अमेठी की जननी भी कहते हैं.
