लॉकडाउन में आधी राहत बाहर निकले डीएम को सिपाही ने हड़काया

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रामपुर : लॉकडाउन में आधी रात को मोटर साइकिल पर शहर में घूमते पकड़े गये डीएम की सिपाही ने तबियत से ‘क्लास’ ली. सिपाही ने डीएम को लॉकडाउन की अहमियत खुलकर सुनाई समझाई. आधी रात लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही और सजा क्या क्या हो सकती है? बेखौफ सिपाही ने डीएम साहब को यह भी मन भर कर सुनाया. डीएम साहब का बड़प्पन यह रहा कि उन्होंने सिपाही द्वारा हड़काये जाने के बाद भी अपनी पहचान नहीं खोली. जैसा सिपाही ने समझाया उसके मुताबिक डीएम साहब ने अपनी मोटर साइकिल वापस की और मौके से चुपचाप चले गये.

औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे जिलाधिकारी

लॉकडाउन का सच जांचने के लिए परिवार वालों को बताकर जिलाधिकारी आधी रात के वक्त अपने एक कर्मचारी की मोटर साइकिल लेकर खुद ही डीएम आवास से निकल पड़े. नाइट पेट्रोलिंग में कोई पुलिसकर्मी पहचाने न साथ ही कानून का भी उल्लघंन भी न हो, इसके लिए उन्होंने बाकायदा हेटलमेट लगा लिया. परिजनों के अलावा किसी कर्मचारी को नहीं बताया कि कहां जा रहे हैं. यहां तक कि बंगले की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी उनके गेट के बाहर निकलते वक्त नहीं पहचान पाये कि मोटर साइकिल पर डीएम साहब ही निकले हैं बाहर.

2 घंटे तक घुमते रहे जिलाधिकारी

मोटर साइकिल पर सवार होकर जिलाधिकारी रामपुर शहर के ज्वाला नगर, अजितपुर, कोसी नदी पुल, मिस्टन गंज, शाहबाद गेट आदि इलाके घूमते रहे. अपने ही शहर में आधी रात के वक्त लॉकडाउन में जिलाधिकारी मोटर साइकिल से दो घंटे तक घूमते रहे. इस दौरान डीएम को महज दो चेकिंग प्वाइंट पर ही रोका गया. शहर में रात के वक्त किस तरह खुलेआम लॉकडाउन की कुछ जगहों पर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? यह आंख से देखने और जानने के बाद भी डीएम ने रात में किसी को नहीं टोका. सिर्फ प्वाइंट्स के नाम दिमाग में फीड कर लिये.

सिपाही को किया सम्मानित

आधी रात को मोटर साइकिल पर लॉकडाउन में घूम रहे डीएम को सिपाही द्वारा हड़काया या पकड़ा जाना आपको नागवार नहीं गुजरा? पूछे जाने पर जिलाधिकारी सिंह ने कहा, “नहीं बिलकुल नहीं. असली और सच्चा तो सही मायने में सिपाही ही सरकारी मुलाजिम निकला. जिसने एलआईसी चौराहे पर मुझे रोक लिया. बाकायदा उसने मुझे लॉकडाउन की अहमियत समझाई. साथ ही आईंदा लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने को भी कहा.” रामपुर डीएम ने आईएएनएस से कहा, “सुबह मैंने सबसे पहले उसी सिपाही मोहित को कलेक्ट्रेट में बुलवाया जिसने मुझे रात में समझाया था कि लॉकडाउन की क्या अहमियत है. मैंने उसे शाबासी और प्रमाण पत्र दिया. ताकि जिले में तैनात अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी ईमानदारी और मेहनत से काम करने का जज्बा पैदा हो सके.”

 

 

 

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