अलीगढ़ नहीं आंसूगढ़ कहिए जनाब!

अपना अलीगढ़

अलीगढ़:  तालों के लिए मशहूर अलीगढ़ की किस्मत पर शायद ताला लगा हुआ है. तभी तो ये प्राचीन जिला आज भी विकास के लिए तरस रहा है. पिछले 20 साल में शहर की आबादी करीब 40 फीसद बढ़ी है, लेकिन अन्य बुनियादी सविधाएं जस की तस बनी हुई हैं. सड़क हो या पार्क, सभी बदहाली के आंसू बहा रहे हैं. स्थिति यह है शहर के हजारों लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही है।

स्मार्ट सिटी की ऐसी स्थिति
केंद्र सरकार की ओर से जारी तीसरी लिस्ट में देश के 30 शहरों के साथ अलीगढ़ भी स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल हुआ. तब लगा कि अलीगढ़ में विकास की बयार बहने वाली है. लेकिन वो मामला भी लिस्ट में नाम से आगे नहीं बढ़ता दिख रहा है. अलीगढ़वासी हर रोज जाम के झाम से जूझते हैं. बढ़ती जनसंख्या ने शहर की हालत और खराब कर दी है. हालात ये है कि, पेड़ों को काटकर कॉलोनियां बनाई जा रही हैं.

धरोहरों में धुरंधर फिर भी पीछे अलीगढ़
ऐतिहासिक धरोहरों के मामले में अलीगढ़ का कोई सानी नहीं हैं. शहर की दर्जनभर से ज्यादाऐतिहासिक धरोहरों की बात करें तो इनमें अचल सरोवर, घंटाघर, जवाहर भवन, साईं मंदिर सारसौल, जामा मस्जिद, एएमयू, जैन मंदिर खिरनी गेट, अलीगढ़ नुमाइश प्रदर्शनी, गिलहराज मंदिर,अचलेश्वर मंदिर, वार्ष्णेय मंदिर, गुरुद्वारा बैकुंठ नगर, सर्वधर्म सत्य साईं सपूत, बाबा बरछी बहादुर, मैथोडिस्ट चर्च, ईदगाह शामिल हैं. इनके सुधार के लिए किए गए कार्य ना के बराबर हैं. हालांकि, बीते दिनों में अचल ताल का सौंदर्यीकरण जरुर हुआ है. ध्रुवीकरण की राजनीति में फंसने के कारण भी अलीगढ़ कासंपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है.

महायोजना के नाम पर महज दिखावा
शहर में सुनियोजित विकास कराने की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण की है. लेकिन हकीकत में अफसर विकास कार्य कर पाने में पूरी तरह से फेल हैं. इसके साथ ही आबादी में फैक्ट्री एवं दुकानें चल रही हैं. कभी तालों के लिए दुनिया में मशहूर अलीगढ़ के उद्योग धंधे भी दम तोड़ते दिख रहे हैं. स्मार्ट सिटी में शामिल शहर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है.

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