दिवाली पर क्यों खरीदें जाते हैं बर्तन, क्या है इसका लक्ष्मी पूजन से कनेक्शन

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नई दिल्ली: खुशियों का पर्व कहे जाने वाली दिवाली अब कुछ ही दिनों में आने वाली है. देश कई दिनों पहले ही दिवाली के लिए माहौल बना गया है. दिवाली पर कई तरह की पूजा-अर्चना की जाती है. सभी लोग अपने अपने घरों को अच्छी तरह से सजा लेते हैं. नए नए कपड़े पहन कर लोग खुशियां बांटते हुए नजर आते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दिवाली पर बर्तन और सिक्के खरीदने का कुछ अलग ही महत्व है.

दिवाली पर गहने-जेवर खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है और कई वर्षों से यह चली आ रही है. खासतौर पर धनतेरस के दिन सिक्के और बर्तन खरीदने का काफी महत्व है. इस दिन लोग अपने अपने घरों में नए बर्तन या सिक्के लाते हैं. ऐसा करना काफी शुभ माना जाता है. इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती खासतौर पर की जाती है. वैभव की इच्छा जो लोग करते हैं वह घर में तरह तरह की चीजें लेकर आते हैं. लोग अपने घरों में हीरा, चांदी, धनिया का बीज, पत्नी के लिए लाल कपड़ा, तिजोरी या फिर स्टील के बर्तन अपने घरों में लाते हैं. लेकिन धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.

लक्ष्मी जी की पूजा

माना जाता है कि लक्ष्मी जी की तरह ही भगवान धनवंतरि भी सागर मंथन से आई हैं. जब वह सागर मंथन के दौरान उत्पन्न हो रही थी तब उनके हाथों में एक कलश था जिसमें अमृत भरा हुआ था. माना जाता है कि जिस वक्त वह सागर से उत्पन्न हुई थी तब उसके हाथों में कलश था इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने का काफी महत्व है. माना जाता है कि अगर इस दिन सिक्के खरीदे जाए तो धन में 13 गुणा वृद्धि हो जाती है. ऐसे में दिवाली के दिन लक्ष्मी जी और मूर्ति खरीदने की परंपरा है. मिट्टी से बनी लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा का काफी महत्व होता है.

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