‘मैं यह सुसाइड गरीबी और बेरोजगारी की वजह से कर रहा हूं’…कलेजा चीर देगी ये चिट्ठी

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लखनऊ/ लखीमपुरखीरी: मैं यह सुसाइड गरीबी और बेरोजगारी की वजह से कर रहा हूं. गेंहूं और चावल सरकारी कोटे से मिलता है पर चीनी, पत्ती, दूध, दाल, सब्जी, मिर्च, मसाले परचून वाला अब उधार नहीं देता. लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है. नौकरी कहीं नहीं मिल रही है।

ये पर्ची इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर पॉलिटिक्स तक के गलियारों में सुर्खी बनी हुई है. सब अपने-अपने तरीके से इस चिट्ठी की व्याख्या कर रहे हैं. काश समय रहते सियासत, सिस्टम, समाज जागा होता तो लखीमपुर के भानु आज जिंदा होते।

क्या है मामला ?

दरअसल, 29 मई को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के मैगलगंज कस्बे में रेलवे लाइन पर कटे शव की जेब से ये सुसाइड नोट मिला. इस सुसाइड में मरने से पहले भानु प्रकाश गुप्ता नाम के शख्स ने अपनी बेबसी को लिखा है. और अपनी मौत की वजह भी लिखी है. ट्रेन की पटरी पर मिला शव मैगलगंज की नई बस्ती के भानु प्रकाश गुप्ता का था. इस सुसाइड नोट का एक-एक शब्द किसी का भी कलेजा चीर कर रख देगा. दरअसल, भानु प्रकाश गुप्ता लखीमपुर के पड़ोसी जिले शाहजहांपुर में एक होटल में काना बनाने का काम करते थे. लेकिन लॉकडाउन के बाद हटोल बंद हो गय और भानु बेरोजगार हो गए. और परिवार तंगी की हालत में आ गया ।

चिट्ठी में आगे लिखा है…

ट्रेन की पटरी पर मिले भानु के शव के दो टुकड़े हो गए थे. वहीं उनका सुसाइड नोट भी दो हिस्से में बंट गया था. उस नोट में आगे लिखा है कि,

‘मुझे खांसी, सांस, जोड़ों में दर्द, और दौरा और बहुत कमजोरी, चलना दूभर और चक्कर आदि हैं. मेरी विधवा मां भी दो साल से खांसी बुखार से पीड़ित हैं. तड़प-तड़प कर जी रहे हैं. लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है. नौकरी कहीं मिल नहीं रही है, जो काम हो. अब खर्चा चलाए व इलाज कराएं हमें न कोई शासन का सहयोग मिला ।’

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