2019 लोकसभा चुनावों में यूपी की राजनीति में भूचाल लाने की तैयारी में अमित जानी!

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कभी मायावती की मूर्तियां तोड़ने और आगरा के ताजमहल में हनुमान चालीसा जाप करने से चर्चा में आए अमित जानी ने आजकल अपने नए ऐलान से हिंदुत्व की राजनीतिक करने वालों में हलचल पैदा कर दी है. बता दें कि, उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जानी ने लोकसभा 2019 के चुनाव में यूपी हरियाणा की सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है. लेकिन अहम बात ये कि, अमित जानी ने उन तमाम विवादित चेहरों को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है जो हिंदुत्व के नाम का झंडा बुलंद करके किसी ना किसी ऐसी घटना में शामिल रहे हैं जिस घटना का संबंध मुस्लिम समुदाय के खिलाफ रहा है.

अमित जानी की किस घोषणा से आया सियासी तूफान!
नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी ने अपने जिन उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है उनमें…
1- अखलाक की हत्या के आरोपी को गौतमबुद्ध नगर-खुर्जा सीट से केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के खिलाफ उतारा जायेगा.
2- राजस्थान के राजसमंद में मुस्लिम युवक की हत्या के आरोपी शंभूलाल रैंगर को आगरा सीट से उम्मीदवार बनाया है.
3- पलवल के जुनैद हत्याकांड के आरोपी नरेश सहरावत को फरीबाद सीट से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है .
4- मुजफ्फरनगर सीट पर दंगो से पहले कवाल में मारे गए सचिन-गौरव के पिता को संजीव बाल्यान के सामने उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया गया है
5- मथुरा सीट अमित जानी खुद चुनाव लड़ सकते है, उससे पहले वो उपचुनाव में भी ताल ठोंक सकत हैं.
6- अलीगढ़ सीट से गायक विकास कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है.

हिंदुत्व के हलकों में हलचल क्यों?
दरअसल, अभी तक बीजेपी और उसके सहयोगी संगठनों की ‘भगवा ब्रिगेड’ के नेता ही हिंदुत्व के मुद्दों को हवा में लहराकर सियासी रोटियां सेकते रहे हैं. राममंदिर जैसे मुद्दों के सहारे अपनी राजनीति की गाड़ी को चलाते रहे हैं. लेकिन अमित जानी के इस दांव ने उन तमाम नेताओं की नींद उड़ा दी.

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बिसाहड़ा बना सियासी अखाड़ा
वैसे तो चुनाव में राममंदिर मुद्दे की वजह से अयोध्या सियासत का केंद्र होता है, लेकिन अमित जानी की बिसाहड़ा में महापंचायत की घोषणा ने बिसाहड़ा को सियासी अकाड़ा बना दिया है. बता दें कि, जानी ने 28 अक्टूबर को 124 गांव की महापंचायत बुलाई थी. इस महापंचायत के ऐलान के बाद शासन प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए. प्रशासन ने इस महापंचायत की अनुमति नही दी लेकिन अमित जानी महापंचायत करने पर अड़े रहे. इस कार्यक्रम को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल भी पहुंचा. बाद में पुलिस ने अमित जानी को गिरफ्तार किया और डासना जेल भेज दिया.अमित जानी का आरोप है कि, ये सब केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के इशारे पर हो रहा है.

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