लखनऊ: बाबरी मस्जिद पर वर्षों से विवाद जारी है, जिसे लेकर कहा जाता है कि मुगल शासक बाबर ने मंदिर तोड़कर अपने नाम की मस्जिद बनवाई थी, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि ये मस्जिद बाबर ने बनाई ही नहीं थी. बाबरी मस्जिद असल में बाबर की सेना के एक जनरल मीर बाक़ी ताशकंदी ने बनवाई थी. मीर बाक़ी ताशकंद का रहने वाला था. बाबर ने उसे अवध प्रांत का गवर्नर बना के भेजा था. बताया जाता है कि पानीपत की पहली लड़ाई में विजय के बाद बाबर की सेना ने जब अवध का रुख किया तब बाबर आगरा में ही रुक गया था. उसने मीर बाक़ी को कमान सौंप दी थी.
खुश करने के लिए रखा गया था नाम
जिस मस्जिद पर सदियों से विवाद जारी है वो भी असल में मीर बाक़ी ने ही बनवाई थी. और बाबर को खुश करने के लिए उसे ‘बाबरी मस्जिद’ का नाम दे दिया था. कुछ लोग ये भी कहते हैं कि इस मस्जिद को बाबर के ही हुक्म पर बनवाया गया था. दोनों ही स्थितियों में ये बात सामने आती है कि बाबर का इस मस्जिद की तामीर में फिजिकली कोई रोल नहीं था.
यह भी पढ़ें : टूट रही थी मस्जिद, ‘रो रहे थे राष्ट्रपति, सो रहे थे प्रधानमंत्री’

बाबरनामा में नहीं घटना का जिक्र
इस मामले में बाबर की जीवनी ‘बाबरनामा’ भी एक अहम दस्तावेज है जिसमें ऐसी किसी घटना का उल्लेख है ही नहीं. एक और तर्क ये भी आता है कि तुलसीदास ने भी कभी ऐसी किसी घटना का ज़िक्र नहीं किया है, जो शायद इस देश में पैदा हुए सबसे बड़े रामभक्त थे. जबकि उन्होंने अपना तमाम जीवन राम को समर्पित कर रखा था. उन्होंने जो भी लिखा सिर्फ राम लिखा. उनके लेखन से भी ‘बाबरी’ घटना नदारद होने के गहरे निहितार्थ हैं.
यह भी पढ़ें : 6 दिसंबर: अयोध्या में परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर
मामला कोर्ट में है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि वाला मसला दोनों पक्ष मिल बैठकर सुलझा लें. ज़रूरत पड़ने पर कोर्ट मध्यस्थता भी करने को तैयार है. हालांकि इस पर कोर्ट में जनवरी से सुनवाई होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष बेशक से इस मसले को सुलझाने में लगे हों, लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्म की भावनाएं इस इमारत से जुड़ी हुई है.
