लखनऊ: राम नाम की राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नया तड़का लगाया है. या यूं कहिए कि, सीएम योगी ने हिंदुत्व की कमान से एक रामबाण चलाया है. उस तीर के निशाने पर केवल और केवल विपक्ष है. मुख्यमंत्री ने सपा, बसपा, कांग्रेस और लेफ्ट जैसे दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि, ये राम के विरोधी लोग हैं. और ‘जो नहीं हैं राम के वो नहीं किसी काम के’.
दरअसल, छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के दौरान रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, ये राम के विरोधी लोग हैं इन्हीं लोगों ने राममंदिर का मुद्दा 2019 के बाद तक टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जोर लगाया है.
बता दें कि, राममंदिर निर्माण के लिए बन रहे माहौल में विश्व हिंदू परिषद और संघ ने अयोध्या और दिल्ली में लाखों की भीड़ जुटाने का ऐलान किया है. इस कड़ी में वीएचपी ने 25 नवंबर को अयोध्या में धर्मसभा बुलाई है. इससे पहले 24 नवंबर को शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे भी अयोध्या पहुंच रहे हैं. इसके अलावा 9 दिसंबर को भी दिल्ली में ऐतिहासिक रैली करने का ऐलान किया है. इस रैली में करीब 8 से 10 लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.
वहीं सीएम योगी के रामवाले और गैर रामवाले बयान के बाद अब सियासी गलियारों में बवाल मच गया है. सपा और कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. सपा ने कहा है कि, सीएम योगी पहली बार सच बोला है. वही राम के काम के नहीं है. राम नाम की भावना जगाकर सत्ता में आ गए और जनता को छल लिया है.
कांग्रेस ने बयान देते हुए कहा है कि, योगी बताएं वो राम के हैं या राम के नाम पर अपना काम निकालने के हैं. वो बताएं उन्होंने कितनी राम की संतान युवाओं को नौकरी दी है. कितनी महिलाओं को सुरक्षा दी है. 2019 में जनता काम पर जवाब चाहती है और ये मुद्दे भटकाने में लगे हैं.
