इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- सभी जिलों के DM 25 फरवरी तक निपटाएं जमीन के मुआवजे की अर्जियां

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में किसानों को मुआवजा दिए बगैर उनकी जमीन अधिग्रहित किए जाने (Land Acquisition in UP) या उनकी जमीनों पर कब्जा किए जाने को लेकर दाखिल हो रही अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को अधिग्रहीत किए बगैर ली गई किसानों की जमीन के मुआवजे की मांग में विचाराधीन अर्जियों को 25 फरवरी 2022 तक निस्तारित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि मुआवजे के लिए कितनी अर्जियां दाखिल की गईं और मुआवजे की कितनी रकम तय की गई?

हाईकोर्ट ने पूछा है कि, यदि रकम तय नहीं की गई है तो इसके क्या कारण हैं. कोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है. याचिका की सुनवाई 25 फरवरी 22 को होगी. यह आदेश मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने राम कैलाश निषाद और अन्य की याचिका पर दिया है. याची राम कैलाश निषाद और अन्य का कहना है कि उसने 25 फरवरी 20 को जिलाधिकारी को मुआवजे की मांग में अर्जी दी है. 1 साल 8 माह बाद भी अर्जी तय नहीं की गई है.

12 मई 16 के शासनादेश के अनुसार यदि बिना अधिग्रहीत किए गए जमीन ली गई है तो मुआवजे के भुगतान करने के मामले में जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी है. कोर्ट ने कहा कि जब शासनादेश में प्रक्रिया तय है तो जिलाधिकारी मुआवजे की अर्जियों को तय क्यों नहीं कर रहे हैं? इसके कारण मुआवजे की मांग में भारी संख्या में याचिकाएं दाखिल हो रही हैं. इसी कारण से हाईकोर्ट ने यूपी के सभी जिलाधिकारियों को जमीन के मुआवजे की अर्जियों को लेकर यह निर्देश जारी किया है.

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