तो इसलिए आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं अखिलेश यादव ?

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लखनऊ : पूर्वांचल की आजमगढ़ लोकसभा सीट पिछली बार की तरह इस बार भी वीवीआईफी श्रेणी में हैं, क्योंकि इस बार यहां से समाजवादी पार्टी  के अध्यक्ष अखिलेश यादव मैदान में हैं, वैसे तो ये सीट समाजवादियों का गढ़ मानी जाती है, मगर चुनाव में कुछ भी हो सकता है ऐसे में अखिलेश क्यों इस सीट से चुनाव लड़ रहा है.

आजमगढ़ है यादवगढ़
दरअसल इस सीट पर यादव मजबूत है, यादवों का कितना प्रभाव है वो इस बात से समझा जा सकता है कि 18 बार हुए आम चुनाव और उपचुनाव में 12 बार यादव प्रत्याशी ही जीता है, इस सीट पर पिछली बार अखिलेश यादव के पिता और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव जीते थे, इस बार उनके बेटे मैदान में हैं, गठबंधन से अखिलेश का नाम तय है, लेकिन बीजेपी ने अभी इस सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, हालांकि चर्चा है कि भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को मैदान में उतार सकती है.

दलित और मुसलमान वोट भी भरमार
आजमगढ़ सीट पर यादवों का बोलबाला तो है ही लेकिन दलित और मुस्लिम फैक्टर भी यहां चलता है, 2011 की जनगणना के मुताबिक करीब 16 फीसदी मुस्लिम और 22 फीसदी दलित है जो किसी भी दल के लिए हार जीत तय कर सकते हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि गठबंधन के बाद अखिलेश यादव को 22 फीसदी दलित वोट बैंक में से अच्छा खासा वोट मिल सकता है जिससे अखिलेश यादव की बड़ी जीत हो सकती है.

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