लखनऊ: 1986 में वित्तविहीन के लिए जो नियम बना था. उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालय आज भी उसी ढर्रे पर चल रहे हैं. शिक्षक पूरे दिन पढ़ाते हैं लेकिन पगार के नाम पर चंद रुपये मिलते. हालात ये है कि, जो कुछ थोड़ा बहुत मानदेय मिलता था. वो भी अब नहीं मिल रहा. आरोप तो यहां तक हैं कि,पिछले साल बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी का पैसा अभी तक नहीं मिला है. उचित मानदेय और सेवा नियमावली में बदलाव की मांग लेकर सूबे के लाखों शिक्षकों ने एक बार फिर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. गुस्साए शिक्षकों ने विधानसभा के घेराव की घोषणा की है. पुलिस ने दारुलशिफा वाले रास्ते पर बैरिकेटिंग करके इन शिक्षकों को रोकने का प्लान बनाया हुआ है. इससे पहल ये शिक्षक होली के समय भी अपनी मांगो को लेकर हल्लाबोल कर चुके हैं.
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वित्तविहीन विद्यालय और वित्तविहीन शिक्षक
- उत्तर प्रदेश में करीब 87% वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हैं.
- प्रदेश में केवल 13% ही सरकारी माध्यमिक विद्यालय हैं.
- करीब 3.5 लाख शिक्षक इन विद्यालयों में पढ़ाते हैं.
- वित्तविहीन विद्यालयों में अंशकालिक शिक्षक रखे जाते हैं.
- पूरे दिन पढ़ाने पर भी केवल पीरियड्स का पैसा मिलता है.
- पिछली सरकार में मानदेय के लिए 200 करोड़ का बजट था.
- वर्तमान सरकार ने मानदेय पर रोक लगा रखी है.
क्या है वित्तविहीन शिक्षकों की मांग
- इन शिक्षकों ने मानदेय की मांग की को लेकर हल्लाबोल का ऐलान किया है.
- समान काम समान वेतन,मानदेय और पूर्णकालिक दर्जे की मांग अहम है .
- माध्यमिक विद्यालय की व्यवस्था 1986 से एक ही ढर्रे पर चल रही है.
- अंशकालिक शिक्षकों के तौर पर इनकी नियुक्ति होती है पूरे दिन स्कूल में रहना होता है.
- पढ़ाने का पैसा केवल अंशकालिक आधार ही मिलता है.
- पढ़ाई का पूरा दारोमदार इनवित्तविहीन शिक्षकों के कंधे पर है.
