लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण का मुकाबला आज, जिसके पक्ष में गए ये समीकरण वो ही होगा सिकंदर

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लखनऊ/नई दिल्ली : लोकसभा चुनावों के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों पर आज मतदान हो रहा है. ऐसे में सभी सियासी दलों की पहली परीक्षा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं. तीन केंद्रीय मंत्रियों की परीक्षा भी इस चरण में है. बीते चुनाव में बीजेपी ने यहां क्लीन स्वीप किया था लेकिन इस बार गठबंधन के गणित में जातियों की गोलबंदी से मुकाबड़ा कड़ा हो गया है. कई जगह तो मुकाबला त्रिकोणीय भी है.

पहले चरण में किस सीट पर कौन
पहले चरण में जिन नेताओं की किस्मत दांव पर लगी है उनमें कई दिग्गज शामिल हैं. गाजियाबाद सीट की बात करें तो यहां पहले बीजेपी बनाम गठबंधन में मुकाबला था लेकिन कांग्रेस ने प्रत्याशी बदल कर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है.

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1-गाजियाबाद से कौन कौन मैदान में
बीजेपी- विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह
गठबंधन- सुरेश बंसल
कांग्रेस- डॉली शर्मा

2- गौतमबुद्ध नगर
बीजेपी- केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा
गठबंधन- डॉ अरविंद सिंह
कांग्रेस- सत्यवीर नागर

3- मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट
बीजेपी- राजेंद्र अग्रवाल
गठबंधन- हाजी याकूब
कांग्रेस- हरेंद्र अग्रवाल

4- कैराना लोकसभा सीट
बीजेपी- प्रदीप चौधरी
गठबंधन- तबस्सुम हसन
कांग्रेस-इमरान मसूद

5- बागपत लोकसभा सीट
बीजेपी- केंद्रीय सत्यपाल सिंह
रालोद- चौधरी जयंत सिंह

6- मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट
बीजेपी- केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान
रालोद- चौधरी अजित सिंह

7- बिजनौर लोकसभा सीट
बीजेपी- कुं. भारतेंदु सिंह
गठबंधन- मलूक नागर
कांग्रेस- नसीमुद्दीन सिद्दीकी

8- सहारनपुर लोकसभा सीट
बीजेपी- राघव लखनपाल शर्मा
गठबंधन-फजलुर रहमान
कांग्रेस- इमरान मसूद

क्या कहते हैं आंकड़े
यूपी में सबसे ज्यादा 80 सीटों पर चुनाव है. यूपी की 8 सीटों पर 11 अप्रेल को चुनाव है. बीते चुनावों का परिणाम देखें तो यूपी में पहले चरण का चुनाव ही आगे का ट्रेंड सेट करता है. इसलिए पहले नजर पर सबकी नजर जमी है. 2014 में बीजेपी ने यहां क्लीन स्वीप किया था. इस वक्त दलित मुस्लिम समीकरण नहीं चल पाया था लेकिन इस बार सपा-बसपा रालोद के साथ आने पर हालात अलग है. पहले चरण के इस चुनाव में दलित-मुस्लिम और जाट समीकरण अहम भूमिका निभाएगा. सीटों के हिसाब से देखें तो इस बार कैराना कसौटी पर है गठबंधन ने यहां से वर्तमान सांसद तबस्सुम को अपना उम्मीदवार बनाया है.

दलितों और मुस्लिमों का समीकरण
गठबंधन की निगाहें यहा दलित और मुस्लिमों और जाट वोटों पर हैं. वहीं बीजेपी ने प्रदीप चौधरी के जरिए जाट- गुर्जरों की गोलबंदी की कोशिश की है. लेकिन जाटों में मजबूत पकड़ रखने वाले कांग्रेस उम्मीदवार हरेंद्र मलिक ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है. सहारनपुर दलित सियासत का गढ़ माना जाता रहा है. इस बार गठबंधन यहां भी दलित-मुस्लिम समीकरण के सहारे हैं. मायावती के यहां मुस्लिम वोटरों पर दिए बयान पर तो घमासान भी मचा है. बिजनौर- मेरठ में भी दलित मुस्लिम पर महाभारत होनी है. इन तमाम सीटों पर बीजेपी के लिए जो बड़ी चुनौती है वो 2014 का प्रदर्शन दोहराना है.

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