नई दिल्ली : चुनाव आयोग के द्वारा गठित कमेटी ने आदर्श आचार संहिता में संशोधन करने की सिफारिशें की है. जिसमें कहा है कि सभी पार्टियों को पहले चरण के मतदान समाप्ति के 72 घंटे पहले अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करना होगा. कमेटी ने चुनावी प्रचार पर रोक का दायरा सोशल माडिया, इंटरनेट, केबल चैनल्स और प्रिंट मीडिया के ऑनलाइन संस्करणों तक बढ़ाने की बात कही है. तो वहीं सोशल मीडिया एजेंसी को कहा है कि वह सभी पार्टियों की राजनीतिक प्रचार का हिसाब रखे कि पार्टी और उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर प्रचार करने के लिए कितना पैसा खर्च किया है.
14 सदस्यों वाली कमेटी का गठन
आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने पिछले साल मीडिया के प्रसार को देखते हुए 14 सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया था. गुरुवार को यह रिपोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को सौंप दी गई. 14 सदस्यों वाली कमेटी की अध्यक्षता उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा ने की है. इस आयोग में नौ अन्य सदस्यों के अलावा सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कानून मंत्रालय, आईटी मंत्रालय, नेशनल ब्रॉडकास्ट एसोसिएशन और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के एक-एक नामित सदस्य शामिल थे. इस समय घोषणापत्र जारी करने को लेकर कोई बंदिश नहीं है.
2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपना घोषणापत्र पहले चरण के मतदान वाले दिन जारी किया था. उस वक्त इस घटना को कांग्रेस ने मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास बताकर आयोग से शिकायत भी की थी लेकिन घोषणापत्र को लेकर कोई कानून नहीं होने के कारण आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर सका था.
वहीं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुच्छेद 126, इलेक्शन साइलेंस के अनुसार चुनाव वाले क्षेत्र में मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर रोक लगता है. कई बार एक जगह इलेक्शन साइलेंस होने के बावजूद दूसरी जगह पर प्रचार जारी रहता है. हालांकि कुछ सिफारिशों को लागू करने से पहले लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करना होगा. जिसके लिए आयोग को कानून मंत्रालय को पत्र लिखना पड़ेगा.
एक नजर इधर भी…
सवाल आरक्षण : सवर्णों देना कितना सही कितना गलत
सिर्फ हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम और ईसाई भी होते हैं सवर्ण! जानिए कैसे मिलेगा आपको फायदा
सुशांत को पसंद आया अंकिता का नया अवतार, कमेंट में लिखा- ‘ये शानदार है’
