नई दिल्ली/अयोध्या: करीब आते चुनाव, लगातार टलती सुनवाई, संघ, संत और विश्वहिंदू परिषद के तीखे तेवरों के बीच राम मंदिर मसले पर घिरी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. चौतरफा आक्रोश झेल रही मोदी सरकार ने अचानक बड़ा दांव चलते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है कि, अयोध्या की गैर विवादित जमीन का हिस्सा राम जन्मभूमि न्यास को दिया जाए.
क्या है मामला?
दरअसल, साल 1992 में बाबरी विध्वंस विवाद के बाद 1993 में केंद्र सरकार ने उस विवादित परिसर के आसपास की करीब 67.703 एकड़ जमीन का इसलिए अधिग्रहण कर लिया था.कि, बाद में वहां कोई गतिविधि ना हो. फिर साल 2013 में राम जन्मभूमि न्यास ने उश जमीन पर मालिकाना हक के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी तब भी तमाम दलीलों और वकीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए यथास्थिति बरकरार रखी थी.कि, विवादित भूमि का फैसला इससे अलग नहीं रखा जा सकता.
केंद्र सरकार ने क्या अर्जी दी है
दरअसल, इस 67 एकड़ में गैर विवादित जमीन में करीब 42 एकड़ जमीन रामजन्म भूमि न्यास की है. अब केंद्र सरकार ने अपनी अपील में कहा है कि, जिस जमीन पर विवाद नहीं है उस पर यथास्थिति बरकरार रखने की जरुरत नहीं है. और मंदिर पर लगातार फैसला टल रहा है इसलिए 0.313 एकड़ विवादित भूमि को छोड़ कर 67.703 एकड़ जमीन मंदिर निर्माण के लिए ये जमीन न्यास को सौंप दी जाए.
कितनी जमीन पर है विवाद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 के ऐतिहासिक फैसले में 2.77 एकड़ जमीन को विवादित बताते हुए इस जमीन को 3 हिस्सों में बांटा था. केंद्र सरकार ने अपनी अपील में केवल 0.313 एकड़ जमीन को ही विवादित माना है, केंद्र सरकार के मुताबिक 2.7 एकड़ जमीन में कब्रिस्तान का भी हिस्सा है
नेताजी कहिन
केंद्र सरकार के इस कदम ने सियासी गलियारों का ताप एकदम से बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, ‘हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं और सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के लिए वो जमीन देने की अपील करते हैं.
सुब्रह्मण्यम स्वामी, ‘सरकार को सुप्रीम कोर्ट से पूछने की जरुरत ही नहीं है, क्योंकि गैर विवादित जमीन की मालिक तो सरकार ही है लेकिन अगर वो कानूनी तरीके से रास्ता निकालना चाहते हैं तो अच्छी बात है’
अयोध्या के पक्षकारों का पक्ष
केंद्र सरकार के इस कदम पर अयोध्या विवाद के पक्षकारों का भी अपना-अपना पक्ष है. रामलला मंदिर के पुजारी आचार्य सतेंद्र दास जब तक विवादित जमीन पर फैसला नहीं हा जाता तब तक मंदिर कैसे बनेगा. सरकार के इस कदम से मंदिर निर्माण में कोई लाभ नहीं होगा’
इकबाल अंसारी, ‘गैरविवादित जमीन सरकार किसे दे रही है हमें इससे को लेना देना नहीं है. हम तो विवादित मुद्दे का हल चाहते हैं’
