हरियाली तीज के दिन बन रहा है शिवयोग, शिवशंकर देंगे अमर सुहाग का वरदान

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श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज व्रत देश भर में मनाया जा रहा है. मान्‍यता है कि हरियाली तीज के दिन माता पार्वती की सैकड़ों सालों की तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें आज के ही दिन अपनाया था. ऐसे में सुहागन महिलाएं यह मानती हैं कि यदि इस दिन वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए सोलह श्रृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा करें तो उनका सौभाग्य बढ़ता है. कजली तीज के नाम से प्रचलित इस त्‍योहार का महत्‍व सुहागन स्त्रियों में बहुत ज्‍यादा है. लगभग पूरे उत्तर भारत में उल्‍लास से मनाए जाने वाले इस त्‍योहार में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरी भक्ति भाव से की जाती है.

तीज के अलावा शिवयोग भी
हरियाली तीज के दिन इस बार शिवयोग भी बन रहा है. यही नहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने की वजह से माना जाता है कि इस दिन शिव की पूजा से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं. विशेषज्ञ मानते है कि ऐसे खास संयोग बहुत कम बनते हैं. इस दिन यदि भक्‍त सच्चे मन से शिव की पूजा करते हैं तो हर मनोकामना पूरी हो जाती है.

इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर भगवान शिव और माता पार्वती की बालू से मूर्ति बनाती हैं और इसकी पूजा करती हैं. पूजा के दौरान सुहाग की चीजें भगवान पर चढाई जाती है. इसके अलावा भगवान शिव को वस्त्र आदि अर्पित किया जाता है. पूजा समाप्‍त होने के बाद हरियाली तीज की कथा कहने और सुनने की परंपरा है. कथा हाथ में अक्षत रखकर किया जाता है. कथा समाप्‍त होने के बाद भगवान गणेश, शिव और पार्वती की पूजा और आरती की जाती है. इसके बाद भगवान की परिक्रमा कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है. अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करते हैं और भगवान को भोग लगाते हैं. इसके बाद नदी या तालाब में मूर्तियों को प्रवाहित की जाती है. पूजा में प्रयोग हुए सुहाग और श्रृंगार के सामान किसी सुहागन को दान किया जाता है.

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