लखनऊ : सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने से मंगलवार को रोका गया तो योगी के खिलाफ बुधवार का दिन विरोध भरा रहा. संसद से सड़क तक उनके खिलाफ सपाइयों और बीएसपी समर्थकों ने तो जैसे मोर्चा ही खोल दिया. सड़कों पर तो योगी और उनकी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तो हुआ ही संसद की कार्यवाही भी इसी मुद्दे को लेकर उठे हंगामे की भेंट चढ़ गयी. संसद की बहस जब चरम पर थी तब एक शख्स चर्चा का विषय बन गया और देखते ही देखते सुर्खियां बटोरने लगा.
बीजेपी पर जमकर साधा निशाना
दरअसल, जिसके बारे में हम जिक्र कर रहे हैं वो समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव हैं जो लोकसभा में माथे पर पट्टी बांधकर पहुंचे थे और बीजेपी पर जमकर बरस रहे थे. इतना हीं नहीं चर्चा ने तब बड़ी बहस का रूप ले लिया जब उन्होंने लोकसभा में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रयागराज में सपा कार्यकर्ताओं की बेरहमी से पिटाई करवायी. इतना नहीं उन्होंने यूपी के प्रशासनिक व्यवस्था को भी कठघड़े में खड़ा कर दिया और प्रयागराज के एसपी और डीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की बात रखी. वहीं धर्मेंद्र यादव का पुरजोर साथ दे रहे थे सपा के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव. वो अपने ही जगह पर खड़े होकर धर्मेंद्र यादव के विरोध के सुर में सुर मिला रहे थे. वैसे देखा जाए तो ये कोई हल्की बात नहीं है कि सत्तासीन सरकार के द्वारा पिटाई करवाने का आरोप सरेआम लोकसभा में लगाया जा रहा हो. और तो और माथे पर पट्टी बंधाकर कर इस आरोप को साबित करने की भी पूरी कोशिश की गयी.
अखिलेश के इलाहाबाद कार्यक्रम से जुड़ा है मामला
हंगामा संसद के बाहर सड़कों पर भी कुछ कम नहीं हो रहा. सड़क पर हुए हंगामे और पथराव में ही धर्मेद्र यादव के जख्मों की सच्चाई छुपी है. दरअसल, मंगलवार के दिन बात ये हुई कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के एक नेता के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने प्रयागराज जा रहे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया था और फिर सपा समर्थकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच नोकझोंक और धक्का मुक्की जैसे हालात पैदा हो गए.
अखिलेश यादव को रोके जाने पर सपा समर्थकों और छात्र संघ के द्वारा विरोध प्रदर्शन करना तो लाजमी ही था. प्रशासन द्वारा लिए गए इस एक्शन के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एसपी गुट के नेता और उनके समर्थकों ने हल्ला बोलना शुरू कर दिया और ताबड़तोड़ पथराव शुरू कर दिया था. वहीं जब हंगामा तेज होने लगा तो पुलिस प्रशासन को एक्शन में आना पड़ा और फिर इस उपद्रव को रोकने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एसपी सांसद धर्मेंद्र यादव भी मौजूद थे और तभी वो भी घायल हो गए. अब बीजेपी सरकार की पुलिस की कार्रवाई हो और विपक्षी दल के नेता उस कार्रवाई की जद में आ जाएं तो मामला तो उठना ही था. एसपी सांसद ने तुरंत ही मामले के दूसरे दिन घायल हालत में, माथे पर पट्टी बांधकर लोकसभा में हंगामा करने पहुंच गए और तो और यूपी की योगी सरकार पर आरोप भी जड़ दिए. इसके अलावा सियासी मैदान में उतरा सपा और बसपा का गठबंधन पूर्व सीएम अखिलेश यादव को लखनऊ एयरपोर्ट पर रोके जाने वाले मामले में एकजुट होकर सरकार के विरोध में खड़ा दिख रहा है. इस संबंध में बुधवार को सपा-बसपा के 15 सदस्यों ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को ज्ञापन सौंपा दिया.
योगी सरकार की अखिलेश के खिलाफ एयरपोर्ट वाली कार्रवाई ने यूपी की सियासत में एक नया मोड़ तो ला ही दिया है वहीं इस पूरे प्रकरण को देखने का दूसरा नजरिया ये भी हो सकता है कि भले ही योगी सरकार ने अखिलेश यादव की प्रयागराज की यात्रा को रोककर छात्रसंघ के शपथग्हण समारोह को बदमजा कर दिया हो लेकिन विपक्षी पार्टियों को सरकार का विरोध करने के लिए एक मुद्दा जरूर हाथ लग गया है. जहां एक तरफ हंगामे और कानून व्यवस्था का डर बता कर योगी सरकार ने अखिलेश की यात्रा पर विराम लगा दिया तो दूसरी तरफ अब सपा समर्थकों ने हंगामा और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर कानून व्यवस्था को ही चुनौती दे दिया.
