कोरोना पर सुगन्धा त्रिपाठी की शानदार रचना
इस कोरोना काल ने हंसती खेलती इंसानी जिंदगियों को हर कोई अपने घर में कैद कर दिया है, सबकुछ बंद है, वहं इश लॉकडाउन में प्रकृति का भी निखरा हुआ रूप सामने आया है. इस पूरे बदलाव को अपने शानदार शब्दों में पिरोया है गोरखपुर की कलमकार सुगन्धा त्रिपाठी ने…।
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