लखनऊ : लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं का मिलना-जुलना जारी है. पिछले कुछ दिनों में महागठबंधन की एकता को बढाने के लिए कई तरह के समीकरण सामने आए हैं. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव पहले बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने के गए. इसके बाद तेजस्वी यादव ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की है.
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश और बिहार को महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है. ऐसे में दोनों प्रदेशों के मुख्य विपक्षी नेताओं का मिलना एक नए समीकरण को हवा दे सकता है. रविवार को तेजस्वी यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती से उनके आवास पर मुलाकात की जोकि डेढ़ घंटे तक चली. इस दौरान उन्होंने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया. साथ ही सपा-बसपा गठबंधन पर अपनी खुशी जताई. इस गठबंधन में राजद भी शामिल हो सकती है और बसपा को बिहार में 1-2 सीटें दी जा सकती हैं. सपा-बसपा ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को दरकिनार कर गठबंधन का ऐलान कर दिया है. वहीं बिहार में तेजस्वी यादव कांग्रेस को साथ लेकर महागठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं हालांकि दोनों राज्यों में इनका लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को हराना ही है.
बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात करने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा था कि हम सबसे छोटे हैं इसलिए सभी का आशीर्वाद लेने आए हैं. लालू यादव जी चाहते थे उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन हो, जो अब हो रहा है. बता दें कि शनिवार को ही मायावती और अखिलेश यादव ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से बसपा-सपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. साथ ही दो सीटें अन्य पार्टी के लिए छोड़ी गई है. वहीं अमेठी-रायबरेली सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ा गया है.
