नई दिल्ली: तलाक, तलाक और तलाक एक पवित्र रिश्ता एक पल में हलाक यानि एक बार में तीन तलाक बोला, सारे रिश्ते खत्म, सारी जिम्मेदारियां खत्म और आदमी आजाद हो गया.तीन तलाक की तलवार से अब तक सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी जहन्नुम हो चुकी है. इसी जंजाल से बचाने के लिए लोकसभा में लाया गया दूसरी बार तीन तलाक बिल पास हो गया.लेकिन विरोध का बिगुल भी जोर से बज रहा है. कुल मिलाकर देखें तो तमाम तकरार और बहस-मुबाहिसों के बाद तत्काल तीन तलाक पर मुस्लिम महिलाओं के हक की मुहिम एक बार फिर उसी मोर्चे पर आकर खड़ी दिख रही है. जहां से करीब एक साल पहले शुरू हुई थी. यानि तीन तलाक को अवैध ठहराने वाला बिल लोकसभा से एक बार फिर पास हो गया.
लोकसभा में कैसे पास हुआ बिल
अंग्रोजों की गुलामी से आजाद हो चुके हिंदुस्तान में एक आबादी है जो तीन तलाक के तमाशे की गुलाम है. सदियों की जलालत वाली जंजीरों को तोड़ने के लिए वृहस्पतिवार को तीन तलाक बिल पर हुई वोटिंग के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े. वहीं AIADMK, DMK, सपा और कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया. विपक्ष इस बिल में सजा के प्रावधान के संशोधन पर अड़ा है.
राज्यसभा में ये हैं रोड़े
लोकसभा में पास होने के बाद ये इस बिल की राह में राज्यसभा में बड़े रोड़े हैं. 245 सीटों वाली राज्यसभा में विपक्ष का पलड़ा ज्यादा भारी है. जेडीयू 6, शिवसेना 3, अकाली दल 3 और RPI की 1 सीट है यानि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की सीट मिलाकर 82 का आंकड़ा है. राज्य सभा में एनडीए के सामने विपक्ष ज्यादा ताकतवर है. कांग्रेस 50, सपा 13, TMC 13, BJD 9, TRS 6, CPM 5, NCP 4, BSP 4, CPI- 2 और PDP की 2 सीटों के साथ कुल 118 सीटें हैं. कुल मिलाकर एनडीए के 82 सांसदों के मुकाबले विपक्ष के पास 118 सदस्य हैं.
‘स्पेशल 37’
लोकसभा में पास होने के बाद अब सरकार का असली इम्तिहान राज्यसभा में होना है. राज्यसभा में सरकार विपक्ष के मुकाबले कमजोर है. ऐसे में 37 सांसदों के वॉकआउट पर इस बिल के पास होने का दारोमदार टिका है.
पिछले साल भी हुआ था ऐसा हाल
28 दिसंबर 2017 को भी तीन तलाक का बिल में पास हुआ था. लेकिन संशोधन पर सहमति ना बनने और विपक्ष के विरोध के बाद राज्यसभा में बिल पास नहीं हो पाया था. विपक्ष की हठधर्मिता को धता बंधाते हुए, सरकार सिंतबर में अध्यादेश लेकर आई थी. लेकिन अब, जब शीतकालीन सत्र में तीन तलाक पर बिल लाया गया तो वही तस्वीर बनती दिख रही है.
अब आगे क्या होगा
कहने को तो एक छोटा सा शब्द है तलाक लेकिन इसकी तबाही से बदरंग हो चुकी है सैकड़ों जिंदगियों की तस्वीर. सालों से मुस्लिम महिलाओं को एक नई सुबह का इंतजार है. लेकिन शीतकालीन सत्र से पहले सवाल ये है कि, क्या राज्यसभा में पास हो पाएगा ये बिल. 8 जनवरी को मौजूदा शीतकालीन सत्र खत्म होना है ऐसे में बिल पास नही हुआ तो ये रद्द हो जायेगा.
तीन तलाक बिल पर किस-किस ने क्या क्या कहा…
अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेपी: लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने पर पीएम मोदी और उनकी सरकार को बधाई, ये मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और समानता सुनिश्चित करने की दशा में एक ऐतिहासिक कदम है.
मल्लिकार्जुन खडगे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता: हम लैंगिग समानता के साथ खड़े हैं लेकिन किसी भा कानून में तलाक देने पर पति को मुजरिम घोषित नहीं किया जाता है. ये विधेयक धरम के नाम पर भेदभाव करता है और धार्मिक आजादी के खिलाफ है.
सुष्मिता देव, सांसद, कांग्रेस: हमारी पार्टी तीन तालक के इस विधेयक के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार के मुंह में ‘राम बगल में छुरी’ वाली मंशा के खिलाफ हैं. सरकार की नीयत मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने और उनका सशक्तिकरण करने की नहीं बलेकिन मुस्लिम पुरुषों को दंडित करने की है जेल बेजने की है.
रविशंकर प्रसाद, कानून मंत्री: इस बिल को राजनीति के तराजू पर तौलने बजाए इंसाफ के तराजू पर तौलने की जरुरत है. हम मानते हैं कि, महिलाओं का सम्मान होना चाहिए. महिलाओं का सशक्तिकरण वोट बैंक का विषय नहीं है.
असदुद्दीन ओवैसी अध्यक्ष, AIMIM: सरकार ने इस बिल में किसी भी पक्ष से बात नहीं की है. जिन महिलाओं के लिए ये बिल लाया जा रहा है. उन तक से बात नहीं की गई है. ये कानून केवल और केवल मुस्लिम महिलाओं को सड़क पर लाने लिए हैं. इस बिल का मकसद केवल मुस्लिम मर्दों को जेल भेजना है. सरकार ने तरफ समलैंगिकता को अपराध से बाहर कर दिया और तीन तलाक को अपराध करार दे रहे हैं. और हिंदू तलाक पर 1 साल की जेल तो मुस्लिम तलाक पर 3 साल क्यों?
स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री: अगर सती प्रथा के खिलाफ कानून बनाया जा सकता है, बाल विवाह और दहेज के खिलाफ कानून बनाया जा सकता है तो तीन तलाक के खिलाफ क्यों नहीं बनाया जा सकता.
मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय मंत्री: मुझे उम्मीद हैं कांग्रेस 1986 वाली गलती नहीं करेगी. तीन तलाक का ये विधेयक मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए है किसी को निसाना बनाने के लिए नहीं. मुस्लिम महिलाओं को कुरीति से न्याय दिलाने के लिए इस विधेयक को सबकी सहमति से पारित किया जाना चाहिए.
आजम खान, वरिष्ठ सपा नेता:तीन तलाक पर कानून क्या कहता है इससे मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं है. तलाक के लिए मुसलमानों को कुरान का ही कानून मानना चाहिए, मुसलमानों के लिए कुरान ही मान्य है.
