बलि के बकरे बनेंगे आपके – हमारे बच्चे – फैज़ान हैदर

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कानपुर : प्रदेश में एक जुलाई से स्कूल खोलने की बात की जा रही है. स्कूल खोलने से कितने भयावह परिणाम आपके और हमारे सामने आने वाले हैं ये कल्पना से परे है. क्या स्कूल बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा? बच्चों के मास्क, साबुन, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेगा? बच्चों को फिलहाल स्कूल भेजना उचित नहीं है. एक्सपेरिमेंट बेसिस पर स्कूल खोले जाएंगे और फीस लेने के बाद कोरोना के केसे बढ़ने पर स्कूल बंद कर दिए जाएंगे.

बिगड़ सकते हैं हालात

अब यह स्पष्ट है कि यह मामला केवल अरबों की हेराफेरी से ही संबंधित है. स्कूल फीस लेने के लिए बच्चों को कोरोना के सामने डालने से गुरेज नहीं किया गया. स्कूली बच्चों के साथ अब यह बीमारी घर के दूसरे बच्चों, माता-पिता, और बुजुर्गों में फैल कर पूरे घर को अपने आगोश में लेने को तैयार है. जुलाई का महीना बरसात के मौसम का प्रारंभ है, बारिश और उमस के कारण वायरस और बैक्टीरिया बड़ी तेजी से फैलते हैं, कोरोना का ये वायरस इस सीजन में कितना भयानक रूप लेगा ये अकल्पनीय है.

स्कूलों का स्वरुप कैसा होगा ?

ये सच है कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य तो हम सब तब देखेंगे जब वह सुरक्षित होंगे. कोरोना लहर के सामने अपने बच्चों को स्कूल में झोंक देने का अर्थ नरभक्षी जानवर के सामने बच्चों को डालने जैसा है. अब सवाल ये है कि कोरोना काल में स्कूल खुलेंगे तो उनका स्वरूप कैसा होगा. किस तरह से सोशल डिस्टनसिंग का पालन होगा. किस तरह से वायरस के खतरे और डर के बीच क्लास चलेंगी.

अपना उत्तर प्रदेश के लिए कानपुर से वरिष्ठ संवाददाता फैज़ान हैदर की रिपोर्ट

 

 

 

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