सीएम योगी ने किया अयोध्या में मूर्ति लगवाने का ऐलान, तो नाराज हो गए संत!

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लखनऊ/वाराणसी : उत्तर प्रदेश में राम जन्म भूमि विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.इसी मामले में अब वाराणसी में एक धर्म सभा में सैकड़ों साधु -संत इकट्ठा हुए.इन साधुओं का आरोप है कि केंद्रीय नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार भगवान राम का अपमान लगातार अपमान कर रही है.यह आरोप साधुओं ने ऐसे वक्त में लगाया है जब राज्य की सत्ताधारी भाजपा ने अयोध्या में भगवान राम की विशाल प्रतिमा लगवाने का फैसला लिया है.मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कुछ साधु तो इतने नाराज थे कि उन्होंने रविवार को अयोध्या में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद की और से आयोजित धर्मसभा को अधर्म सभा बता दिया.बता दें कि इस धर्म सभा में जितने भी वक्ताओं ने भाग लिया सभी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई टालने की आलोचना की.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में उपस्थित साधुओं को ऐसा लगता है कि राम और सरदार पटेल को बराबर करने की कोशिश की जा रही है.वाराणसी के साधु स्वामु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति भगवान का अपमान है. इससे राम का अपमान होगा क्योंकि मूर्ति के अस पास पक्षी और जीव जंतु खुले में घूमेंगे. राम भगवान है इसलिए उनकी मूर्ति सिर्फ मंदिर में रखी जानी चाहिए जोकि चारों तरफ से घिरी हो जिससे कि भगवान का अपमान न हो. वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वरुपानन्द सरस्वती की ओर से हुआ है स्वरुपानन्द सरस्वती ने कहा कि बीजेपी राम को सरदार पटेल की प्रतिस्पर्धा में उतारना चाहती है. पटेल ने कुछ सूबों का देश में विलय कराया था जबकि भगवान राम पूरे ब्रह्माण्ड के स्वामी है.

भाजपा सरकार ने हाल ही में गुजरात राज्य में देश के पहले गृह मंत्री की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा बनवायी है.शंकराचार्य ने कहा कि भगवान राम राजनेता नहीं थे.उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि आदित्यनाथ को हिन्दू धरम की समझ है या नहीं?हमें यह जानने की जरूरत है कि आखिर क्यों अयोध्या में राम की मूर्ति लगाने का फैसला हिन्दू विरोधी है? मोदी और योगी सरकारें हिंदू धर्म को सांप्रदायिक ताक़त में बदलने की कोशिश कर रही है. बता दें कि वाराणसी में इकट्ठे हुए साधुओं ने अयोध्या में राम की प्रतिमा के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास किया.यह प्रस्ताव योगी के उस प्लान को फेल कर देगा जिसमें उन्होंने एक धर्म विशेष को खुश करने के लिए राम प्रतिमा बनवाने की घोषणा की थी.

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