स्पेशल ट्रेन से आए 338 मजदूर हुए लापता, ढूंढ रही दो राज्यों की पुलिस

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लखनऊ : गुजरात के वडोदरा  से 12 मई को यूपी (UP) के 1908 प्रवासी मजदूरों को लेकर स्पेशल ट्रेन चली थी. 13 मई की सुबह 6 बजे ट्रेन बांदा पहुंची. ट्रेन से उतरने वाले लोगों की जब गिनती की गई तो केवल 1570 मजदूर ही मिले. ट्रेन से लापता 338 मजदूरों की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. लापता मजदूरों को दोनों राज्यो का प्रशासन ढूंढवा रहा है.

केवल 3 जगह ही रुकी थी ट्रेन

रेलवे का कहना है कि ट्रेन केवल 3 जगह रुकी थी जिसमें रतलाम, झांसी और तीसरा स्टेशन बांदा है, जहां ट्रेन को पहुंचना था. कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार कोई भी व्यक्ति बांदा के अलावा और किसी स्टेशन पर उतर नहीं सकता था.22 सामान्य डिब्बों की यह ट्रेन गुजरात के वडोदरा स्टेशन से मंगलवार को चली थी. सभी यात्रियों की जानकारी के साथ इसका एक लेटर अपर कलेक्टर वड़ोदरा डीआर पटेल द्वारा स्थानीय प्रशासन को भेजा गया था. अबतक यह दावा किया जा रहा था कि पुख्ता स्वास्थ्य जांच और पड़ताल के बाद ही श्रमिकों को ट्रेनों से उनके गृह राज्यों में भेजा जा रहा है. बांदा प्रशासन इस मामले में गुजरात प्रशासन से संपर्क कर गुमशुदा यात्रियों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है.

लापता मजदूर ट्रेन में सवार न हुए हों?’

चित्रकूटधाम मंडल बांदा के कमिश्नर गौरव दयाल ने कहा, “हम वडोदरा प्रशासन से संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं. हो सकता है कि कम पाए गए 338 मजदूर ट्रेन में सवार ही न हुए हों? या सूची में गलती हो सकती है.” उन्होंने कहा कि  22 डिब्बों की ट्रेन में मानक के अनुसार 1908 मजदूर नहीं बैठाए जा सकते. इस बात की संभावना ज्यादा है कि सूची बनाने में चूक हुई हो. फिर भी हम इसकी जांच-पड़ताल करा रहे हैं. बता दें कि बुधवार तक यूपी के मजदूरों को लेकर 301 स्पेशल ट्रेनें अलग-अलग जिलों तक पहुंच चुकी हैं. इनसे 3.61 लाख से भी ज्यादा मजदूर अपने घर आ चुके हैं. महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, गुजरात सहित कई राज्यों से यूपी के मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का सिलसिला लगातार जारी है.

 

 

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