लखनऊ: बीते चुनाव में सारी दुश्मनी भुलाकर मायावती ने जब सपा के साथ गठबंधन किया था तो बीजेपी को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. फिर गठबंधन से अलग होकर तमाम मौकों पर मायावती समाजवादी पार्टी पर निशाना साधती रहीं.लेकिन अब विधायकों की बगावत के बाद बहन जी ने सपा के खिलाफ खुलकर लड़ाई का ऐलान कर दिया है.इधर कहने वाले कह रहे हैं कि, बहन जी, बीजेपी के लिए उपजाऊ जमीन तैयार कर रही हैं लेकिन इसमें वो अपना नुकसान कर लेंगी।
‘बादलपुर’ का ‘बदलापुर’
बसपा विधायकों के बगावती किरदार में सैफई वाली कहानी (अखिलेश यादव की भूमिका )सामने आने के बाद, अब बादलपुर वाली बहनजी ने बदलापुर का ऐलान कर दिया. बीते चुनाव में इतिहास ( गेस्ट हाउस कांड) भुलाकर नया भूगोल बनाने के लिए सपा के साथ आईं बसपा सुप्रीमो मायावती, अब सपा से हुए गठबंधन को बड़ी गलती बताकर फिर से इंतकाम की कसम लेती दिखाई दीं, मायावती ने कहा कि, हमने जल्दबाजी में सपा से गठबंधन कर लिया था. इनके परिवारिक कलह के चलते गठबंधन फेल हुआ. एक समय इनके पिता श्री ने भी हमारी पार्टी तोड़ी थी अब अखिलेश यादव ने भी वही गलती की है. अखिलेश यादव का हाल भी मुलायम सिंह वाला होगा।
‘बीजेपी को सपोर्ट करेंगे’
अपनेसभी 7 बागी विधायकों के निलंबन का ऐलान करते हुए, मायावती ने सपा से भी सियासी लड़ाई का खुलकर शंखनाद कर दिया. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि, अखिलेश यादव का हाल भी मुलायम सिंह जैसा होगा और ‘जैसा को तैसा के लिए’ बीजेपी को सपोर्ट भी कर देंगी आने वाले MLC चुनाव में सपा को हराने के लिए हम बीजेपी का सहयोगी कर देंगे ।
सपा ने कहा सच्चाई सामने आई
राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर जहां बीजेपी ने पहले बसपा को पास दिया था, बसपा ने अपना एक उण्मीदवार मैदान में उतार दिया था.वहीं अब बीजेपी पर मायावती के सॉफ्ट कॉर्नर को, बीजेपी भी बड़े सलीके से ले रही है. बीजेपी ने कहा कि, हमने गेस्ट हाउस के समय भी मायावती का साथ दिया अब भी सुरक्षा करेंगे. अब बात निकली तो दूर तक गई. सपा से अदावत और बीजेपी से मोहब्बत का इकरार सियासी गलियारों में गूजने लगा, समाजवादी पार्टी कह रही है कि, सच्चाई आखिर कबतक छिपती. मायावती औऱ बीजेपी के गठजोड़ की बात सामने आ ही गई है.
क्या होगा हाथी का हाल?
अपनों की बगावत ने जहां बसपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. वहीं बीजेपी से इकरार भी, मुस्लिमों की नाराजगी में, मायावती के लिए मुसीबतों का सबब बन सकता है. बीजेपी के समर्थन की बात अब सोशल मीडिया से लेकर तमाम जगह तेजी से फैल रही है. मुस्लिमों में एख संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि, मायावती बीजेपी के साथ जाएंगी. ऐसे में एक सवाल ये है कि, क्या राज्यसभा चुनाव के चक्कर में मायावती 2022 की राह भी कठिन कर रही हैं।
